सिक्किम में शाको छो झील को लेकर बढ़ी चिंता
सिक्किम की सबसे संवेदनशील हिमनद झील
गंगटोक: सिक्किम में हिमनद झीलों से जुड़े खतरों को लेकर किए गए नए आकलन में शाको छो (Shako Cho) को राज्य की सबसे संवेदनशील हिमनद झील के रूप में चिह्नित किया गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पीछे हटने और हिमनद झीलों के आकार में बदलाव के बीच इस झील की स्थिति पर विशेष निगरानी की जरूरत बताई गई है। सिक्किम पहले भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF की विनाशकारी घटना का सामना कर चुका है, इसलिए ऐसी झीलों की पहचान और निगरानी राज्य की आपदा तैयारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
शाको छो को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
शाको छो उत्तरी सिक्किम के ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में स्थित है। हालिया अध्ययन में झील की भौगोलिक स्थिति, आसपास के ग्लेशियर, ढलान, पानी की मात्रा और प्राकृतिक बांध की परिस्थितियों जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर जोखिम का आकलन किया गया। इन मानकों के आधार पर इसे सिक्किम की सबसे संवेदनशील हिमनद झीलों में शीर्ष पर रखा गया है।
हिमनद झीलें आमतौर पर ग्लेशियरों के पिघलने से बनने वाले पानी से विकसित होती हैं। तापमान बढ़ने और ग्लेशियर पीछे हटने पर कुछ झीलों का आकार तेजी से बढ़ सकता है। अगर ऐसी झील को रोककर रखने वाला प्राकृतिक मोरेन बांध कमजोर पड़ जाए या उसमें अचानक बड़ी मात्रा में पानी पहुंच जाए तो GLOF की स्थिति पैदा हो सकती है।
दक्षिण ल्होनक की तबाही से मिला बड़ा सबक
सिक्किम के लिए हिमनद झीलों का खतरा केवल आशंका नहीं है। अक्टूबर 2023 में दक्षिण ल्होनक झील से आई विनाशकारी बाढ़ ने तीस्ता नदी घाटी में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। इस घटना में जान-माल के भारी नुकसान के साथ सड़क, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं समेत बुनियादी ढांचे को गंभीर क्षति पहुंची थी।
इस आपदा के बाद सिक्किम और पूरे हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील हिमनद झीलों की निगरानी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जोखिम वाली झीलों की समय रहते पहचान करने से चेतावनी प्रणाली और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत किया जा सकता है।
लगातार निगरानी की जरूरत
शाको छो को संवेदनशील बताए जाने का मतलब यह नहीं है कि वहां तत्काल GLOF होने वाला है। यह एक जोखिम आकलन है, जिसके आधार पर झील की नियमित निगरानी और विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन को प्राथमिकता दी जा सकती है। सैटेलाइट तस्वीरों, फील्ड सर्वे और आधुनिक सेंसर की मदद से झील के क्षेत्रफल, जलस्तर और आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों में होने वाले बदलावों पर नजर रखी जा सकती है।
विशेषज्ञ हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन को भी महत्वपूर्ण चुनौती मानते हैं। बढ़ता तापमान ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है, जिससे कई स्थानों पर नई हिमनद झीलें बन रही हैं या पुरानी झीलों का विस्तार हो रहा है।
आपदा तैयारियों के लिए अहम अध्ययन
शाको छो की संवेदनशीलता का आकलन सिक्किम प्रशासन के लिए भविष्य की आपदा रणनीति तैयार करने में उपयोगी हो सकता है। संवेदनशील झीलों के नीचे बसे इलाकों की पहचान, निकासी योजना, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और नदी घाटियों में रहने वाले लोगों को जागरूक करने जैसे कदम संभावित नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं।
दक्षिण ल्होनक की घटना के बाद सिक्किम के लिए यह चुनौती और भी गंभीर हो गई है। ऐसे में शाको छो सहित जोखिम वाली हिमनद झीलों की वैज्ञानिक निगरानी और समय रहते सुरक्षा उपाय हिमालयी राज्य की दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।