सिक्किम: सिक्किम हाई कोर्ट ने इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (IRCON) और उसके ठेकेदारों को सेवोक-रंगपो रेलवे प्रोजेक्ट के सिलसिले में तीस्ता नदी में मिट्टी और खुदाई से निकली सामग्री डालने से रोक दिया है।
यह निर्देश नामची जिले के मेल्ली बाज़ार के निवासियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका (WP(PIL) No. 09 of 2026) की सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि रेलवे निर्माण से निकली मिट्टी, मलबा और खुदाई का कचरा नदी के किनारे डाला गया है, जिससे तीस्ता नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो रहा है और पानी सिक्किम की ओर ओवरफ्लो हो रहा है।
चीफ जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस भास्कर राज प्रधान की डिवीजन बेंच ने IRCON और उसके ठेकेदारों को निर्देश दिया कि वे खुदाई से निकली सामग्री को केवल तय डंपिंग साइटों पर ही डालें, न कि नदी में।
कोर्ट ने नामची के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को निर्देश दिया कि वे इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करें और नियमों के उल्लंघन पर 'जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974' के तहत कार्रवाई करें।
कलेक्टर से यह जांच करने के लिए भी कहा गया है कि क्या डंपिंग से नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित हुआ है और यदि ऐसा है, तो सुधारात्मक उपाय सुझाएं।
इस मामले में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रतिवादी (respondents) बनाया गया है।
कोर्ट ने निरीक्षण रिपोर्ट पर संज्ञान लिया
7 सितंबर 2026 को, हाई कोर्ट ने नामची स्थित डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (DLSA) को याचिका में बताई गई जगहों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।
3 अक्टूबर को DLSA सेक्रेटरी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर संज्ञान लेने के बाद, कोर्ट ने आगे डंपिंग रोकने और नदी पर इसके संभावित असर का आकलन करने के लिए नए निर्देश जारी किए।
याचिकाकर्ताओं ने डंप की गई सामग्री को हटाने, सुरक्षा दीवारें बनाने और स्थिति का आकलन करने के लिए हाइड्रोलॉजिस्ट और पर्यावरण इंजीनियरों की एक विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की है।
उन्होंने 'प्रदूषण फैलाने वाला ही भुगतान करेगा' (Polluter Pays) सिद्धांत के तहत बहाली की लागत की भी मांग की है, जिसके तहत पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों को ही सुधार कार्य का खर्च उठाना पड़ता है। ज़िला कलेक्टर की रिपोर्ट तीन हफ़्तों में आनी है और इस मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर, 2026 को तय की गई है।
तीस्ता एक बड़ी नदी प्रणाली है जो सिक्किम और पश्चिम बंगाल में समुदायों और इकोसिस्टम को सहारा देती है। नदी की धाराओं में निर्माण का मलबा डालने से पानी का बहाव रुक सकता है, कटाव बढ़ सकता है और बाढ़ का ख़तरा भी बढ़ सकता है। इसलिए, जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ रहे हैं, पर्यावरण से जुड़े सुरक्षा उपायों को लागू करना एक अहम चिंता का विषय बन गया है।
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