बीकानेर : राजस्थान के बीकानेर स्थित पीबीएम (PBM) अस्पताल में एक बार फिर मातृ मृत्यु का मामला सामने आया है। अस्पताल में उपचाराधीन 25 वर्षीय महिला की सिजेरियन डिलीवरी के बाद उत्पन्न जटिलताओं के कारण मौत हो गई। महिला पिछले एक महीने से अधिक समय से अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थी और चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार को महिला की मौत हो गई। इसके साथ ही हाल के सप्ताहों में पीबीएम अस्पताल में मातृ मृत्यु का यह तीसरा मामला बन गया है। वहीं, राज्य में पिछले तीन महीनों के दौरान मातृ मृत्यु का आंकड़ा बढ़कर 19 पहुंच गया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घिया ने बताया कि मृतका की पहचान कमला मेघवाल (25) के रूप में हुई है। उन्हें 8 जून को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। वह मधुमेह (डायबिटीज़) से पीड़ित थीं और यह उनकी तीसरी गर्भावस्था थी। चिकित्सकों के अनुसार, सिजेरियन ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और उन्हें गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ा।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि महिला को बचाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम लगातार उपचार कर रही थी। आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान उनकी स्थिति गंभीर बनी रही। सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इस घटना के बाद एक बार फिर मातृ मृत्यु के मामलों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित महिलाओं की विशेष निगरानी और उच्च स्तरीय चिकित्सा प्रबंधन की आवश्यकता होती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए समय पर जांच, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और प्रसव के बाद निरंतर निगरानी बेहद जरूरी है। यदि किसी महिला को पहले से गंभीर बीमारी है, तो उसके उपचार और प्रसव की योजना अधिक सावधानी से बनाई जानी चाहिए।
पीबीएम अस्पताल राजस्थान के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल है, जहां बीकानेर संभाग सहित आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में लगातार सामने आ रहे मातृ मृत्यु के मामलों ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग परिस्थितियां होती हैं और मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि महिला के उपचार से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।
राज्य में तीन महीनों के दौरान 19 मातृ मृत्यु के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। विभागीय अधिकारी इन मामलों की समीक्षा कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन कारणों से ऐसी घटनाएं हो रही हैं और भविष्य में इन्हें कैसे रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ मृत्यु रोकने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रसव पूर्व जांच, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, प्रसव के बाद नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की विशेष निगरानी पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।
फिलहाल महिला की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन ने चिकित्सकीय प्रक्रिया और उपचार संबंधी सभी पहलुओं की समीक्षा शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। वहीं, लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।