Barmer बारमेर: राजस्थान में इस वर्ष गर्मी ने समय से पहले ही अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। अप्रैल के पहले सप्ताह में ही तापमान ने कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। रविवार को प्रदेश के पश्चिमी जिलों में जबरदस्त गर्मी का प्रकोप देखने को मिला। बाड़मेर और जैसलमेर में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया। खासकर बाड़मेर में तापमान 45.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो पिछले 26 वर्षों में अप्रैल माह के पहले सप्ताह का सबसे अधिक तापमान है। इससे पहले 1998 में यहां 3 अप्रैल को 45.2 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था।
भीषण गर्मी का यह प्रभाव सिर्फ दिन तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि रात के तापमान में भी भारी उछाल देखने को मिला। बाड़मेर में रविवार रात न्यूनतम तापमान 28.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 6.4 डिग्री अधिक है। इससे लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पाई। जैसलमेर में भी अधिकतम तापमान 45 डिग्री दर्ज किया गया।
प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी स्थिति कुछ अलग नहीं रही। रविवार को जोधपुर, जयपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, जालौर और चित्तौड़गढ़ समेत कुल 21 शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रिकॉर्ड किया गया। राजधानी जयपुर में तापमान 40.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे शहर में दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। तेज धूप और गर्म हवाओं के चलते लोग घरों में ही रहने को मजबूर हो गए।
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दो-तीन दिनों में भी राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। मौसम विज्ञान केन्द्र, जयपुर ने सोमवार को प्रदेश के 14 जिलों के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है, जिनमें जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर, चूरू, झुंझुनू, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ शामिल हैं।
मौसम विभाग ने आठ से दस अप्रैल तक जैसलमेर, बाड़मेर, जालौर, चित्तौड़गढ़ और कोटा जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि राज्य के लगभग 22 जिलों के लिए येलो अलर्ट घोषित किया गया है, जिसमें जयपुर, कोटा, भरतपुर, अलवर, सीकर, बीकानेर, पाली और नागौर जैसे जिले शामिल हैं।
इस बीच हेल्थ सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अचानक बढ़ी गर्मी शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने आमजन को सलाह दी है कि गर्मी से बचाव के लिए दिन के सबसे गर्म समय, दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहरी गतिविधियों से बचें, पानी और अन्य तरल पदार्थ पर्याप्त मात्रा में लें, हल्के व सूती कपड़े पहनें और बच्चों तथा बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।