Udaipur। उदयपुर : सांप दिखते ही अधिकतर लोग घबरा जाते हैं और कई बार डर के कारण उन्हें मार भी देते हैं। जबकि सांप पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। इसी सोच को बदलने और इंसानों व सांपों के बीच संतुलन बनाने का काम उदयपुर के चमन सिंह चौहान पिछले कई दशकों से कर रहे हैं। करीब 55 वर्षीय चमन सिंह चौहान ने अपना जीवन सांपों के संरक्षण और लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित कर दिया है।
आज स्थिति यह है कि उदयपुर में कहीं भी सांप निकलने की सूचना मिलते ही सबसे पहले लोगों को जिस नाम पर भरोसा होता है, वह चमन सिंह चौहान ही हैं। वे न सिर्फ सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू करते हैं, बल्कि उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए जंगलों में वापस छोड़ते हैं।
चमन सिंह बताते हैं कि उनका वन्यजीवों के प्रति लगाव बचपन से ही था। मात्र 7-8 वर्ष की उम्र से ही वे घायल पक्षियों और जानवरों की मदद करने लगे थे। धीरे-धीरे यह रुचि उनके जीवन का हिस्सा बन गई और वे एनिमल एड से जुड़कर वन्यजीव संरक्षण के कार्यों में सक्रिय हो गए।
उनके जीवन में एक घटना ने बड़ा बदलाव लाया। एक बार सांप और नेवले की लड़ाई के दौरान सांप अपनी जान बचाने के लिए एक घर में घुस गया, लेकिन उस समय जानकारी और संसाधनों की कमी के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने चमन सिंह को भीतर तक झकझोर दिया और उन्होंने ठान लिया कि अब वे सांपों की जान बचाने के लिए काम करेंगे।
इसके बाद उन्होंने विधिवत रूप से स्नेक रेस्क्यू का प्रशिक्षण लिया और पूरी सावधानी के साथ सांपों का रेस्क्यू कार्य शुरू किया। शुरुआती दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अनुभव बढ़ने के साथ उनका काम और भी प्रभावी होता गया।
आज चमन सिंह चौहान हजारों सांपों को सुरक्षित रेस्क्यू कर चुके हैं और उन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ चुके हैं। कई बार उन्होंने एक ही स्थान से 50 से अधिक सांपों का सफल रेस्क्यू कर सभी को हैरान कर दिया। उनका कहना है कि हर रेस्क्यू ऑपरेशन में उनकी पहली प्राथमिकता इंसानों और सांप—दोनों की सुरक्षा होती है।
वे लोगों को जागरूक भी करते हैं कि सांपों को मारना समाधान नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाना ही सही तरीका है। उनके प्रयासों से कई लोगों की सोच में बदलाव आया है और अब वे सांप निकलने पर उन्हें बचाने की पहल करते हैं।
चमन सिंह चौहान का जीवन इस बात का उदाहरण है कि अगर समर्पण और सही सोच हो, तो इंसान प्रकृति और जीव-जंतुओं के बीच संतुलन बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।