डूंगरपुर : शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के दावों के बीच राजस्थान के डूंगरपुर जिले से चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। ब्लॉक पाल देवल के ग्राम गरदुना स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय नवाघरा के बच्चे स्कूल भवन के अभाव में खुले आसमान और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए अस्थायी टीन शेड के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। विद्यालय का पुराना भवन करीब एक साल पहले जर्जर घोषित कर गिरा दिया गया था, लेकिन इसके बाद अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
विद्यालय ग्राम गरदुना के पीईईओ शिशोद क्षेत्र के अंतर्गत आता है। बताया जा रहा है कि पुराने भवन की स्थिति खराब होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उसे जर्जर घोषित किया गया था। इसके बाद भवन को गिरा दिया गया। उस समय ग्रामीणों और अभिभावकों को उम्मीद थी कि जल्द ही नया स्कूल भवन तैयार हो जाएगा और बच्चों को सुरक्षित जगह पर पढ़ने की सुविधा मिलेगी। करीब एक वर्ष गुजरने के बाद भी स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
टीन शेड बना बच्चों का अस्थायी स्कूल
नया भवन नहीं बनने के कारण ग्रामीणों ने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने स्तर पर अस्थायी टीन शेड की व्यवस्था की। इसी शेड के नीचे कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। गर्मी के दिनों में टीन की छत के कारण बच्चों को तेज गर्मी का सामना करना पड़ता है, जबकि बारिश में स्थिति और खराब हो जाती है।
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय भवन नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पर्याप्त और सुरक्षित कक्षाओं के अभाव में विद्यार्थियों को मौसम की मार झेलते हुए पढ़ना पड़ रहा है।
मानसून में बढ़ी परेशानी
मानसून के दौरान विद्यालय की अस्थायी व्यवस्था बच्चों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। ग्रामीणों के मुताबिक तेज बारिश होने पर टीन शेड के नीचे पानी भर जाता है। बारिश की बौछारें अंदर आने के कारण बच्चों का बैठना मुश्किल हो जाता है। जमीन गीली होने और शेड से पानी आने की स्थिति में कई बार पढ़ाई भी प्रभावित होती है।
खुले स्थान पर कक्षाएं लगने के कारण अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता भी सता रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांप-बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में छोटे बच्चों को खुले या अस्थायी स्थान पर पढ़ाना जोखिम भरा हो सकता है।
एक साल बाद भी निर्माण का इंतजार
ग्रामीण नारायण लाल डामोर के अनुसार, पुराने भवन को गिराए जाने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि शिक्षा विभाग जल्द नए भवन का निर्माण शुरू करा देगा। उनका कहना है कि करीब एक साल गुजरने के बावजूद नए भवन को लेकर जमीनी स्तर पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
ग्रामीणों का दावा है कि अभी तक नए भवन के लिए स्पष्ट बजटीय स्वीकृति या निर्माण कार्य शुरू होने से जुड़ी जानकारी उन्हें नहीं मिली है। इसी कारण अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
प्रशासन से जल्द निर्माण की मांग
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया जल्द पूरी कर काम शुरू किया जाना चाहिए।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा के साथ उनकी सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। स्कूल में पर्याप्त कक्षाएं, सुरक्षित छत और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
नए भवन के निर्माण में हो रही देरी से नाराज ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और शिक्षा विभाग जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं कराते हैं तो उन्हें धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।
फिलहाल राजकीय प्राथमिक विद्यालय नवाघरा के बच्चे स्थायी भवन का इंतजार कर रहे हैं। करीब एक साल से टीन शेड के नीचे चल रही पढ़ाई ने शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन पर है कि नए स्कूल भवन के निर्माण को लेकर कब ठोस कदम उठाया जाता है।