राजस्थान : पूर्व उपमुख्यमंत्री और पंजाब कांग्रेस के प्रभारी सचिन पायलट ने सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी को चुनौती दी है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी शासित पंजाब में भी स्कूलों की जांच उसी तरह की जानी चाहिए, जैसे दूसरे राज्यों में की जा रही है। उनके बयान का केंद्र स्कूलों की स्थिति का आकलन करते समय समान मानदंड अपनाने का सवाल है। पंजाब की जिम्मेदारी मिलने के बाद पायलट की यह टिप्पणी शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी राजनीतिक बहस में महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

पायलट ने सीजेपी से पंजाब में भी वही नजरिया अपनाने की मांग की, जिसके आधार पर अन्य राज्यों के स्कूलों की कमियां सामने लाई जा रही हैं। उनकी चुनौती का आशय है कि किसी राज्य में सत्तारूढ़ दल के आधार पर निरीक्षण का तरीका नहीं बदलना चाहिए। हालांकि, उनके बयान को पंजाब के सभी स्कूलों में कमियां होने की पुष्टि के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह ऑडिट की निष्पक्षता और अलग-अलग राज्यों में समान तरीके से मूल्यांकन करने की मांग है।

इस टिप्पणी की पृष्ठभूमि में पंजाब के लुधियाना में सीजेपी की ओर से तीन स्कूलों का निरीक्षण है। सह-संयोजक सौरव दास के नेतृत्व वाली टीम ने एक सरकारी स्कूल ऑफ एमिनेंस, एक सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया था। पायलट की प्रतिक्रिया इसी निरीक्षण के बाद सामने आई। इससे स्पष्ट है कि उनकी चुनौती पंजाब में किसी भी निरीक्षण के नहीं होने के बजाय वहां अपनाए जा रहे दृष्टिकोण से संबंधित है। 

निरीक्षण को लेकर प्रकाशित विवरण में स्कूल ऑफ एमिनेंस में बेहतर सुविधाएं और अन्य दो स्कूलों में समस्याएं मिलने का उल्लेख है। इसके बाद ऑडिट के निष्पक्ष होने को लेकर सवाल उठे। आम आदमी पार्टी ने पायलट को हिमाचल प्रदेश और पंजाब के स्कूलों की तुलना करने की चुनौती भी दी। हालांकि, तीन विद्यालयों के निरीक्षण से पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। व्यापक आकलन के लिए अधिक स्कूलों और स्पष्ट मानदंडों का विवरण महत्वपूर्ण होगा।  

इस घटनाक्रम में स्कूलों की स्थिति के साथ उनके मूल्यांकन का तरीका भी चर्चा में आया है। अलग-अलग विद्यालयों की तुलना तभी उपयोगी होती है, जब निरीक्षण में पूछे गए प्रश्न और सुविधाओं को परखने के आधार स्पष्ट हों। पायलट की समान तरीके से ऑडिट करने की मांग इसी प्रश्न को सामने रखती है। किसी विद्यालय की अच्छी सुविधाओं और दूसरे विद्यालय की समस्याओं, दोनों का विवरण महत्वपूर्ण है। केवल एक पक्ष को प्रमुखता देने से व्यापक तस्वीर अधूरी रह सकती है।

सरकारी स्कूलों का आकलन कई अलग-अलग पहलुओं से जुड़ा होता है। भवन, शिक्षण संसाधन, विद्यार्थियों के लिए सुविधाएं और शिक्षकों की उपलब्धता जैसे विषय इसमें शामिल हो सकते हैं। हालांकि, पायलट के उपलब्ध बयान में किसी विशेष सुविधा का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया गया है। इसलिए किसी निश्चित कमी को उनके बयान का हिस्सा बताना उचित नहीं होगा। उनकी सार्वजनिक मांग पंजाब में भी दूसरे राज्यों जैसा ऑडिट करने और मूल्यांकन में समान दृष्टिकोण रखने तक सीमित है।

पायलट हाल ही में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए हैं। इस जिम्मेदारी के संदर्भ में उनका बयान राज्य सरकार की शिक्षा व्यवस्था और उसकी समीक्षा पर कांग्रेस का सवाल सामने रखता है। फिर भी इसे किसी घोषित आंदोलन, अभियान या औपचारिक जांच की मांग से जोड़ना उपलब्ध जानकारी से संभव नहीं है। उन्होंने सीजेपी को चुनौती दी है, लेकिन आगे के कार्यक्रम का विवरण नहीं दिया गया है। कांग्रेस की ओर से किसी निर्धारित स्कूल निरीक्षण की योजना भी सामने नहीं आई है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी की तुलना वाली चुनौती ने बहस को दो राज्यों की शिक्षा व्यवस्था तक पहुंचा दिया है। हालांकि, राजनीतिक चुनौती और किसी व्यवस्थित तुलनात्मक अध्ययन के बीच अंतर है। स्कूलों की वास्तविक तुलना के लिए उनकी श्रेणी, विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों का संदर्भ जरूरी होगा। अलग परिस्थितियों वाले विद्यालयों को बिना इन जानकारियों के समान आधार पर रखना अधूरा आकलन हो सकता है। फिलहाल ऐसा कोई विस्तृत तुलनात्मक अध्ययन उपलब्ध विवरण में शामिल नहीं है।

सीजेपी के लिए इस बहस का प्रमुख प्रश्न अपने निरीक्षण के निष्कर्षों और तरीके को स्पष्ट करना है। सार्वजनिक रूप से सामने आने वाले विवरण से समझा जा सकेगा कि किन सुविधाओं को देखा गया और समस्याओं का आकलन कैसे हुआ। उपलब्ध जानकारी में निरीक्षण की पूरी रिपोर्ट नहीं है। इसलिए ऑडिट को पूरी तरह निष्पक्ष या पक्षपातपूर्ण बताने का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। पायलट ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पंजाब में समान मानदंड अपनाने की बात कही है।

पंजाब के सरकारी स्कूलों के ऑडिट पर अब कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और सीजेपी से जुड़ी प्रतिक्रियाएं चर्चा में हैं। सचिन पायलट ने दूसरे राज्यों की तरह पंजाब में भी जांच करने की चुनौती दी है। आगे निरीक्षण के विस्तृत निष्कर्ष और संबंधित पक्षों के स्पष्ट जवाब से इस बहस की तस्वीर बेहतर समझी जा सकेगी। फिलहाल मुद्दे का केंद्र स्कूलों की सुविधाएं और उनका समान आधार पर मूल्यांकन है। राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से आगे विद्यार्थियों से संबंधित वास्तविक स्थिति का प्रमाणित विवरण महत्वपूर्ण रहेगा।

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