राजस्थान नगर निगम चुनाव : भाजपा के विवेक राजवंशी निर्विरोध कोटा के उप महापौर चुने गए
Jaipur जयपुर। भाजपा के विवेक राजवंशी को शनिवार को कोटा नगर निगम का उप महापौर निर्विरोध चुना गया, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार विनीता पूनिया सीकर जिले के खाटूश्यामजी नगर निगम की अध्यक्ष चुनी गईं। कोटा में भाजपा के उम्मीदवार को निर्विरोध चुना गया क्योंकि कांग्रेस ने उप महापौर पद के लिए कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।
चुनाव के बाद राजवंशी ने कहा कि वे नागरिक सेवाओं में सुधार और कोटा को स्वच्छ एवं हरा-भरा शहर बनाने की दिशा में काम करेंगे। वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा कोटा के लिए व्यक्त किए गए दृष्टिकोण के अनुरूप काम करेंगे। जयपुर, जोधपुर और कोटा की तीन प्रमुख नगर निगमों में उप महापौर चुनाव हो रहे हैं।
जयपुर में भाजपा की उम्मीदवार सरोज कंवर का मुकाबला कांग्रेस से है। कांग्रेस नेताओं ने क्रास वोटिंग की संभावना जताई है, जबकि राजस्थान के शहरी विकास और आवास मंत्री झबर सिंह खर्रा ने कहा है कि भाजपा पार्षद एकजुट और अनुशासित हैं और क्रास वोटिंग नहीं होगा।
नगर निगम चुनाव जयपुर, जोधपुर और कोटा में हाल ही में संपन्न हुए महापौर चुनावों के बाद हो रहे हैं। भाजपा ने तीनों निगमों में महापौर पद जीते हैं। आगामी पंचायती राज चुनावों के कार्यक्रम को लेकर राजस्थान राज्य चुनाव आयोग पर भी सबकी नजरें टिकी हैं।
खबरों के मुताबिक, चुनाव कार्यक्रम की घोषणा लगभग 30 सितंबर को हो सकती है, जिसके बाद आचार संहिता लागू हो जाएगी। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम राज्य चुनाव आयोग निर्धारित करेगा। ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए आरक्षण प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले चरण के चुनावों की तैयारियां चल रही हैं।
खाटूश्यामजी में कांग्रेस की विनीता पूनिया ने भाजपा उम्मीदवार प्रेम देवी को 10-9 वोटों से हराकर नगर पालिका अध्यक्ष का पद हासिल किया। राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए मतपेटी को स्ट्रांगरूम से बाहर निकालने के बाद 21 सितंबर को डाले गए 19 वोटों की गिनती शनिवार को की गई।
खाटूश्यामजी नगर पालिका में 20 सदस्यीय बोर्ड है जिसमें आठ भाजपा पार्षद, आठ कांग्रेस पार्षद, तीन निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद शामिल हैं। 21 सितंबर को उन्नीस पार्षदों ने मतदान किया था, जबकि एक कांग्रेस पार्षद अनुपस्थित था।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने 25 सितंबर को प्रस्तावित पुनर्मतदान पर रोक लगा दी थी और अधिकारियों को पहले से डाले गए वोटों की गिनती करने का निर्देश दिया था। न्यायालय का यह आदेश वार्ड 11 की पार्षद और अध्यक्ष पद की उम्मीदवार पूनिया द्वारा दायर याचिका के बाद आया था।