Rajasthan राजस्थान: विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने अरावली पहाड़ियों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले और केंद्र सरकार की सिफारिश पर चिंता जताई है। जूली ने कहा कि अरावली राजस्थान की जीवनरेखा है और यह रेगिस्तान के फैलाव को रोकने में अहम भूमिका निभाती है। वैज्ञानिकों ने भी माना है कि अगर अरावली पर्वतमाला न होती, तो दिल्ली और आसपास का इलाका रेगिस्तानी बन जाता।
जूली ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में देश और दुनिया पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंतित है, लेकिन केंद्र और राज्य स्तर पर अरावली पर्वतमाला को बचाने पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक सिफारिश भेजी है कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को खनन के लिए खोल दिया जाए, जो कि एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है।
टीकाराम जूली ने कहा कि जनता इस मुद्दे को समझती है और उन्हें पता है कि कुछ राजनीतिक दल केवल जाति और धर्म के नाम पर वोट पाने के लिए विभाजनकारी बातें करते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। उनका कहना था कि ऐसे कदम पर्यावरण संरक्षण के लिए हानिकारक हैं और राज्य और देश की प्राकृतिक धरोहर को खतरे में डाल सकते हैं।
जैसा कि अरावली पर्वतमाला न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए जलवायु संतुलन और जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ऐसे में इसके संरक्षण के लिए ठोस और सख्त कदम उठाना आवश्यक है। जूली ने केंद्र और राज्य सरकार से अपील की कि अरावली की पहाड़ियों की ऊँचाई और खनन संबंधी नीति पर पुनर्विचार किया जाए ताकि पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों से ध्यान हटाकर देश को पर्यावरण सुरक्षा और स्थायित्व की दिशा में सोचना चाहिए। अरावली पर्वतमाला को बचाना सिर्फ राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए जरूरी है।