जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का बिगुल बज गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने शनिवार को प्रदेश में पंचायत चुनाव चार चरणों में कराने का कार्यक्रम घोषित कर दिया। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव कार्यक्रम की जानकारी दी। चुनावी प्रक्रिया 8 अक्टूबर से शुरू होगी, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए पहले चरण का मतदान 23 अक्टूबर को होगा। पंच और सरपंच पदों के लिए पहले चरण की वोटिंग 25 अक्टूबर को कराई जाएगी।चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। यह चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार सरकारी घोषणाओं, तबादलों और चुनाव को प्रभावित कर सकने वाली प्रशासनिक गतिविधियों पर निर्धारित प्रतिबंध लागू रहेंगे।
चार चरणों में होंगे पंचायत चुनाव
राजस्थान में जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। पहले चरण का मतदान 23 अक्टूबर, दूसरे चरण का 29 अक्टूबर, तीसरे चरण का 4 नवंबर और चौथे चरण का मतदान 14 नवंबर को होगा।वहीं पंच और सरपंच पदों के लिए भी चार चरणों में वोटिंग होगी। पहले चरण में 25 अक्टूबर, दूसरे चरण में 31 अक्टूबर, तीसरे चरण में 6 नवंबर और चौथे चरण में 16 नवंबर को मतदान कराया जाएगा।राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से मतदान प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए जिलों और पंचायत क्षेत्रों को अलग-अलग चरणों में शामिल किया गया है।
8 अक्टूबर से शुरू होगी प्रक्रिया
चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 8 अक्टूबर को पहले चरण के लिए लोक सूचना जारी होने के साथ चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य पदों के लिए पहले चरण में उम्मीदवार 13 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे।इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और उम्मीदवारों को नाम वापस लेने का अवसर मिलेगा। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।अलग-अलग चरणों के लिए अधिसूचना और नामांकन की तारीखें भी चरणवार निर्धारित की गई हैं, ताकि पूरे प्रदेश में चुनाव प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी हो सके।
जैसलमेर और फलोदी में पहले चरण में मतदान
पहले चरण में जैसलमेर और फलोदी सहित निर्धारित क्षेत्रों में मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने विभिन्न जिलों को अलग-अलग चरणों में बांटा है। कुछ जिलों में एक चरण में ही मतदान प्रक्रिया पूरी हो जाएगी, जबकि बड़े जिलों में एक से अधिक चरणों में मतदान कराया जाएगा।चार चरणों में चुनाव कराने के पीछे मतदान केंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा, कर्मचारियों की उपलब्धता और चुनाव सामग्री के प्रभावी प्रबंधन जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जाता है।
EVM और बैलेट पेपर दोनों का इस्तेमाल
पंचायती राज चुनाव में मतदान के लिए दो अलग-अलग व्यवस्थाएं रहेंगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।वहीं पंच और सरपंच पदों के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएंगे। इस तरह मतदाताओं को पंचायत चुनाव में पद के अनुसार अलग-अलग मतदान प्रक्रिया से गुजरना होगा।पंच और सरपंच चुनाव की मतगणना मतदान समाप्त होने के बाद उसी दिन ग्राम पंचायत मुख्यालय पर की जाएगी। इससे इन पदों के नतीजे मतदान के दिन ही सामने आने लगेंगे।
41 जिला परिषदों में चुनाव
चुनाव कार्यक्रम के तहत राजस्थान की 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों के लिए चुनाव कराए जाने हैं। इसके अलावा प्रदेश की 14 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंच चुने जाएंगे।इस पूरी प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में पंचायती राज जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। ग्रामीण स्तर पर विकास योजनाओं, स्थानीय प्रशासन और पंचायत व्यवस्था में इन निर्वाचित प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य आगे जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव में भी भूमिका निभाएंगे।
महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण
राजस्थान की पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में इस बार भी बड़ी संख्या में महिलाएं पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के रूप में चुनावी मैदान में दिखाई देंगी।आरक्षण प्रक्रिया के तहत विभिन्न पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद संभावित उम्मीदवारों ने पहले से ही अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी थीं।अब चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार और राजनीतिक दलों को आयोग की ओर से निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।आचार संहिता लागू रहने के दौरान चुनाव को प्रभावित करने वाली नई सरकारी घोषणाओं और योजनाओं पर प्रतिबंध रहेगा। सरकारी संसाधनों का चुनाव प्रचार में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा प्रशासनिक तबादलों और अन्य फैसलों पर भी चुनाव आयोग के नियम लागू होंगे।चुनाव आयोग का उद्देश्य सभी प्रत्याशियों को समान अवसर उपलब्ध कराना और मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना है।
गांवों में बढ़ेगी चुनावी सरगर्मी
चुनाव की तारीखें घोषित होने के बाद राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में चुनावी माहौल तेज होने वाला है। सरपंच और पंच पद के संभावित प्रत्याशियों के साथ पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदार अब औपचारिक रूप से चुनावी मैदान में उतरेंगे।गांवों में स्थानीय विकास, सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। पंचायत चुनावों में स्थानीय समीकरणों और उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
नवंबर तक चलेगी चुनाव प्रक्रिया
चार चरणों में होने वाली मतदान प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के मध्य तक चलेगी। जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के लिए अंतिम चरण का मतदान 14 नवंबर को होगा, जबकि पंच और सरपंच पदों के लिए चौथे और अंतिम चरण की वोटिंग 16 नवंबर को होगी।इसके बाद जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की मतगणना तथा प्रधान और जिला प्रमुख जैसे पदों के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। राज्य निर्वाचन आयोग ने पूरी चुनावी प्रक्रिया को नवंबर के अंत तक संपन्न कराने का कार्यक्रम तय किया है।राजस्थान में पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ अब ग्रामीण राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। चार चरणों में होने वाले इस चुनाव में लाखों मतदाता अपने स्थानीय जनप्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। नामांकन से लेकर मतदान और मतगणना तक राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी।चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक जिला परिषद-पंचायत समिति मतदान 23 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 4 नवंबर और 14 नवंबर को, जबकि पंच-सरपंच मतदान 25 अक्टूबर, 31 अक्टूबर, 6 नवंबर और 16 नवंबर को निर्धारित है।
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