जयपुर: राजस्थान में जिला प्रमुख पदों पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर चल रहे मामले में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। सरकार ने अदालत को बताया कि जिला प्रमुख पदों पर ओबीसी आरक्षण का निर्धारण सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता कपिल प्रकाश माथुर ने पक्ष रखते हुए कहा कि ओबीसी आयोग ने डोर-टू-डोर सर्वे और जन आधार से उपलब्ध आंकड़ों के परीक्षण के बाद आरक्षण की सिफारिश की थी। इसी आधार पर जिला प्रमुख पदों पर ओबीसी वर्ग को आरक्षण दिया गया है।

50 फीसदी आरक्षण सीमा के आधार पर तय हुई सीटें

सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय की है। इसी सीमा के तहत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण निर्धारित किया गया है।

सरकार के अनुसार, एससी और एसटी वर्ग के लिए कुल 15 सीटें आरक्षित रखी गई हैं। ऐसे में 50 फीसदी आरक्षण सीमा के भीतर ओबीसी वर्ग के लिए पांच सीटों का प्रावधान किया गया है।

राज्य सरकार ने कहा कि केवल ओबीसी आबादी के अनुपात या जिला प्रमुख पदों की संख्या बढ़ने के आधार पर आरक्षण में बढ़ोतरी नहीं की जा सकती।

याचिकाकर्ता ने उठाया था आरक्षण कम होने का मुद्दा

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आनंद शर्मा ने अदालत को बताया कि वर्ष 2020 में जिला प्रमुखों के कुल 33 पदों में से ओबीसी के लिए पांच सीटें आरक्षित थीं।

याचिका में कहा गया कि अब जिला प्रमुखों के पद बढ़कर 41 हो गए हैं, लेकिन ओबीसी वर्ग के लिए अभी भी पांच सीटें ही आरक्षित रखी गई हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय 50 फीसदी सीमा के भीतर रहते हुए ओबीसी आरक्षण की नए सिरे से गणना की जाए।

याचिका में कहा गया कि पंचायती राज व्यवस्था में ओबीसी वर्ग को उचित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

ओबीसी आयोग को पक्षकार नहीं बनाने का सरकार ने उठाया मुद्दा

राज्य सरकार ने अपनी दलील में यह भी कहा कि आरक्षण का निर्धारण ओबीसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर किया गया है, लेकिन याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में आयोग को पक्षकार नहीं बनाया है।

सरकार ने इसी आधार पर याचिका को खारिज करने का आग्रह किया है। मामले पर हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

RCSAT अध्यक्ष नियुक्ति पर HC सख्त, तीन सप्ताह का समय दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण (RCSAT) में अध्यक्ष पद की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार को तीन सप्ताह का समय दिया है।

जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने कहा कि यदि तय समय में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति नहीं की जाती है तो कार्मिक सचिव को अदालत में पेश होकर जवाब देना होगा।

यह आदेश अधिवक्ता दिलीप कुरका और अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया।

चार महीने से खाली है अध्यक्ष पद

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि तीन सप्ताह के भीतर अधिकरण के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति कर दी जाएगी। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय कर दी।

गौरतलब है कि इससे पहले 4 अगस्त को हाईकोर्ट ने अधिकरण में खाली पदों पर नियुक्ति नहीं होने पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने जल्द नियुक्ति नहीं होने पर कार्मिक सचिव को पेश होने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद सरकार ने अधिकरण में दो सदस्यों की नियुक्ति कर दी थी, लेकिन अध्यक्ष पद अभी भी खाली है।

1300 से ज्यादा मामलों की सुनवाई प्रभावित

याचिका में अधिवक्ता सुनील समदड़िया ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के सेवा संबंधी विवादों की सुनवाई के लिए सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि पिछले करीब चार महीनों से अध्यक्ष पद खाली होने के कारण अधिकरण का काम प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में एक न्यायिक अधिकारी ही प्रभावी रूप से कार्य कर रहे हैं।

अधिवक्ता के अनुसार, अधिकारी के उपलब्ध नहीं होने पर अधिकरण की कार्यवाही रुक जाती है, जिसके कारण 1300 से ज्यादा अपीलों की सुनवाई लंबित है।

इन मामलों में कर्मचारियों के तबादले, पदोन्नति, वरिष्ठता और पेंशन जैसे विवाद शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियुक्ति नहीं होने से कर्मचारियों को लंबे समय तक न्याय का इंतजार करना पड़ रहा है।

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