आरटीई के बावजूद कोटा में प्रवेश नहीं, अभिभावकों ने दी हड़ताल की चेतावनी
आरटीई के बावजूद कोटा में प्रवेश नहीं
कोटा। कोटा सरकार गरीब तबके के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क शिक्षा देने के लिए आरटीई के तहत स्कूलों में प्रवेश के लिए लॉटरी निकालती है। इस साल के लिए भी लॉटरी निकाली गई थी। ऑनलाइन वैरिफिकेशन के बाद स्कूलों में एडमिशन की लिस्ट भी जारी कर दी लेकिन इसके बावजूद कोटा में कई स्कूलों में बच्चों के एडमिशन नहीं लिए जा रहे हैं। स्कूल संचालक अलग अलग तरह के तर्क देकर बच्चों की रिपोर्टिंग ही नहीं करवा रहे हैं। जिसके चलते पेरेंट्स में नाराजगी है। वहीं शिक्षा विभाग की तरफ से भी इस पर कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
पोर्टल पर तो ऐसे ही दिखाता है- स्कूल प्रशासन सोमवार को इन्द्र विहार स्थित एक निजी स्कूल में पेरेंट्स ने पहुंचकर अपनी नाराजगी जताई। स्थानीय पार्षद योगेश आहलूवालिया के साथ पेरेंट्स इस स्कूल में पहुंचे। पेरेंट्स का आरोप है कि लिस्ट में नाम होने के बावजूद भी बच्चों को एडमिशन नही दिया जा रहा है। जब भी स्कूल में जाते हैं अभद्र तरीके से बात करते हैं और वापस जाने को कह दिया जाता है। बार-बार यही कहते हैं कि पोर्टल पर तो ऐसे ही दिखाता है अभी एडमिशन नहीं हो रहे हैं। पेरेंट्स का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई खराब हो रही है। याचिका लगी है पर हर स्कूल पर लागू नहीं- पार्षद अभी दूसरे स्कूल में जा रहे हैं वहां भी फीस दे रहे हैं। अगर दो तीन महीने बाद स्कूल में आरटीई के तहत एडमिशन होगा तो क्या फायदा। बच्चों की फीस भी लग रही है और पढ़ाई भी खराब होगी।
इधर, स्कूल प्रबंधन ने पेरेंट्स के सामने तर्क दिया कि कोर्ट में याचिका लगाई हुई है। इस पर पार्षद ने कहा कि कोर्ट का आदेश सिर्फ उन स्कूलों के लिए है जिनकी तरफ से याचिका लगी है। हर स्कूल के लिए नहीं है। लेकिन, याचिका का हवाला देकर स्कूल में बच्चों को एडमिशन नहीं दिया जा रहा। पार्षद योगेश आहलूवालिया ने कहा कि स्कूलों में एडमिशन नहीं हो रहे और डीईओ या शिक्षा विभाग की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है। पेरेंट्स ने चेतावनी दी है कि अगर स्कूल में आज से एडमिशन प्रोसेस शुरू नहीं हुआ तो स्कूल को ताला लगा देंगे और धरना देंगे। उनका कहना है कि लिस्ट में जिन बच्चों के एडमिशन कन्फर्म हैं उनके तो एडमिशन लिए जाए। वहीं स्कूल स्टाफ का कहना है कि उनके पास एडमिशन के निर्देश आने पर ही वह एडमिशन लेंगे।