जयपुर: अपराध का स्वरूप तेजी से बदलने के साथ पुलिसिंग के सामने नई डिजिटल चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। इनसे निपटने के लिए राजस्थान पुलिस को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), साइबर सुरक्षा और ओएसइंट जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाने की पहल शुरू की गई है। कोटा में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए तीन दिवसीय ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं साइबर सुरक्षा आधारित स्मार्ट पुलिसिंग’ प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। इसमें तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल के जरिए अपराध अनुसंधान, डिजिटल इंटेलिजेंस, साइबर जांच और रोजमर्रा की पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी), कोटा के तकनीकी सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को आईआईआईटी कोटा परिसर में महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम 19 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस विशाल बंसल, उप महानिरीक्षक पुलिस कुँवर राष्ट्रदीप, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और कोर्स समन्वयक प्रोफेसर ज्ञान सिंह मौजूद रहे।

डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने आधुनिक तकनीक से पुलिसिंग को सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार और स्मार्ट पुलिसिंग को बढ़ावा देने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए। पुलिस बल को भविष्य की डिजिटल चुनौतियों के लिए तैयार करने और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल से नागरिकों को अधिक सुरक्षित एवं प्रभावी पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।

कोटा शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों की एआई, साइबर सुरक्षा, ओएसइंट और अन्य उभरती डिजिटल तकनीकों के संबंध में व्यावहारिक दक्षता बढ़ाना है। इन तकनीकों के इस्तेमाल से अपराध अनुसंधान, डिजिटल इंटेलिजेंस और साइबर जांच को अधिक प्रभावी बनाने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। तीन दिवसीय कार्यक्रम में कोटा शहर और कोटा रेंज के अन्य जिलों से 75 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। प्रशिक्षण में वास्तविक पुलिसिंग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी ज्ञान और कौशल विकसित किया जा रहा है।

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