जयपुर: प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत बड़ी संख्या में खातों के निष्क्रिय होने और उनमें शून्य राशि होने के आंकड़ों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। गहलोत ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इन आंकड़ों को सरकार के ‘गरीब कल्याण’ के दावों की वास्तविक तस्वीर बताया और देश में बढ़ती आर्थिक असमानता पर चिंता जताई।

गहलोत ने अपनी पोस्ट में कहा कि जनधन योजना का हर चौथा खाता निष्क्रिय है, जबकि 5.72 करोड़ खातों में एक रुपया तक नहीं है। उनका कहना है कि यह स्थिति केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करती है। गहलोत ने आरोप लगाया कि गलत नीतियों के कारण गरीब और कमजोर वर्ग की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, जबकि दूसरी ओर देश के चंद अमीर लगातार और अधिक संपन्न होते जा रहे हैं।

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब आरटीआई के जरिए सामने आए आंकड़ों के अनुसार 12 अगस्त 2026 तक देश में करीब 59.03 करोड़ जनधन खाते थे। इनमें 15.36 करोड़ खाते निष्क्रिय और 5.72 करोड़ खातों में कोई राशि जमा नहीं थी। इन खातों में कुल जमा राशि 3.15 लाख करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है।

गहलोत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगातार उठाए जा रहे आर्थिक असमानता के मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में अमीर और गरीब के बीच बढ़ती खाई गंभीर चिंता का विषय है। गहलोत ने मनरेगा जैसी गरीब कल्याणकारी योजनाओं को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके दुष्परिणाम आने वाले समय में दिखाई दे सकते हैं और परिस्थितियां और खराब हो सकती हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार से गरीब और कमजोर वर्ग की आर्थिक स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने तथा बढ़ती असमानता को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

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