ALWAR अलवर। अलवर पुलिस ने एक इसाई मिशनरी से जुड़े हॉस्टल पर छापा मारकर धर्मांतरण के बड़े खेल का पर्दाफाश किया और वहां से 52 बच्चों को मुक्त करवाया। बच्चों को अलग-अलग राज्यों से लाकर रखा गया था और शिक्षा के नाम पर उन्हें ईसाई धर्म की शिक्षा दी जा रही थी। पुलिस के अनुसार, छापे के दौरान कई बच्चे हॉस्टल की दीवार कूदकर भागने लगे, जिससे पूरी घटना उजागर हो गई। यह कार्रवाई धर्मांतरण के प्रयासों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई। अलवर पुलिस ने मौके से गुजरात के अहमदाबाद निवासी अमृत और अलवर जिले के रामगढ़ निवासी सोनू रायसिख को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि यह हॉस्टल एक एनजीओ के जरिए संचालित हो रहा था, जो तमिलनाडु में रजिस्टर्ड है और देश के विभिन्न हिस्सों से फंडिंग प्राप्त करता है।
जांच में यह सामने आया है कि इस एनजीओ का नेटवर्क राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में फैला हुआ है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और इसके संचालकों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए विस्तृत छानबीन कर रही है। स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के हॉस्टल में बच्चों को शिक्षा के नाम पर धर्मांतरण करने की कोशिश की जा रही थी, जो कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ है। बच्चों के माता-पिता और समाज के अन्य सदस्यों ने पुलिस की कार्रवाई की सराहना की है और ऐसे प्रयासों को रोकने की मांग की है।
पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है और उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य जांचा जा रहा है। इस मामले ने पूरे इलाके में सनसनी मचा दी है और बच्चों की सुरक्षा तथा शिक्षा के लिए कानूनी उपायों की आवश्यकता पर ध्यान खींचा है। प्रशासन ने सभी संबंधित एजेंसियों से अपील की है कि वे बच्चों को धर्मांतरण से बचाने और ऐसे नेटवर्क का पता लगाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।