वारिस पंजाब डे को नहीं मिली ECI मान्यता, चुनाव लड़ने का ऐलान

चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच अमृतपाल सिंह से जुड़े अकाली दल वारिस पंजाब डे ने साफ कर दिया है कि भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) से राजनीतिक दल के रूप में औपचारिक पंजीकरण नहीं मिलने की स्थिति में भी वह 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ेगा। संगठन के नेताओं का कहना है कि अगर चुनाव आयोग से पार्टी के रूप में मान्यता नहीं मिलती है, तो उसके उम्मीदवार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरेंगे।

वारिस पंजाब डे का राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण फिलहाल लंबित है। संगठन ने जनवरी 2025 में निर्वाचन आयोग के समक्ष पंजीकरण के लिए आवेदन किया था। पंजीकरण में देरी के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा। अदालत में सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से संगठन के पंजीकरण को लेकर कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, आयोग ने अभी पंजीकरण को लेकर अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

चुनाव लड़ने पर संगठन का स्पष्ट रुख

मोहाली में संगठन के पूआध क्षेत्रीय कार्यालय के उद्घाटन के दौरान वरिष्ठ नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि संगठन 2027 के विधानसभा चुनाव में हर हाल में हिस्सा लेगा। उन्होंने कहा कि यदि उस समय तक पार्टी को निर्वाचन आयोग से औपचारिक पंजीकरण नहीं मिलता है, तो उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। उनका कहना था कि संगठन पहले भी निर्दलीय उम्मीदवारों के माध्यम से चुनाव लड़ चुका है और पंजीकरण की स्थिति चुनाव लड़ने के इरादे में बाधा नहीं बनेगी।

वारिस पंजाब डे के नेताओं का दावा है कि संगठन ने पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में अपना आधार मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसके लिए क्षेत्रीय स्तर पर कार्यालय खोले जा रहे हैं और कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाया जा रहा है। संगठन का जोर खासतौर पर पंजाब के ग्रामीण क्षेत्रों और युवाओं के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने पर है।

पंजीकरण का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में

वारिस पंजाब डे ने निर्वाचन आयोग से पंजीकरण में हो रही देरी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। जुलाई 2026 में अदालत के समक्ष दायर याचिका में संगठन ने आयोग को प्रस्तावित नाम ‘अकाली दल (वारिस पंजाब डे)’ को मंजूरी देने और राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत करने के निर्देश देने की मांग की थी। अदालत ने निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था।

बाद की सुनवाई में निर्वाचन आयोग ने संगठन के पंजीकरण से जुड़ी कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का उल्लेख किया। आयोग की ओर से यह बात दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष रखी गई। इसके बाद पंजीकरण का मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। संगठन की ओर से हालांकि यह लगातार कहा जा रहा है कि वह चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह तैयार है।

2027 चुनाव के लिए तैयारी तेज

पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। चुनाव में अभी समय है, लेकिन वारिस पंजाब डे ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। संगठन पहले ही उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर चुका है। अगस्त 2026 में बस्सी पठाना विधानसभा सीट से सतवंत सिंह को अपना पहला उम्मीदवार घोषित किया गया था। इससे यह संकेत मिला कि संगठन केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी भी कर रहा है।

इसके बाद संगठन ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दिया। मोहाली में पूआध क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन भी इसी विस्तार की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। संगठन के नेताओं का कहना है कि आने वाले समय में पंजाब के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़ाई जाएगी।

अमृतपाल सिंह के नाम से जुड़ी राजनीति

वारिस पंजाब डे की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख चेहरा खड़ूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह हैं। संगठन के गठन और विस्तार के बाद से पंजाब की राजनीति में इसे एक नए राजनीतिक धड़े के रूप में देखा जा रहा है। अमृतपाल सिंह 2024 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ूर साहिब सीट से निर्वाचित हुए थे।

अब संगठन की कोशिश विधानसभा चुनाव के जरिए अपने राजनीतिक प्रभाव को और बढ़ाने की है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि पंजाब से जुड़े मुद्दों, युवाओं, नशे, भ्रष्टाचार और जवाबदेह शासन जैसे विषयों को चुनावी एजेंडे में प्रमुखता दी जाएगी। हालांकि, संगठन को अपनी राजनीतिक पहचान को व्यापक बनाने और अलग-अलग वर्गों तक पहुंच कायम करने की चुनौती भी रहेगी।

ECI की मंजूरी से जुड़ा बड़ा सवाल

वारिस पंजाब डे के लिए सबसे बड़ा सवाल फिलहाल निर्वाचन आयोग से औपचारिक पंजीकरण और चुनाव चिह्न हासिल करने का है। किसी राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण होने के बाद ही संगठन अपने चुनावी अभियान को पार्टी के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न के साथ आगे बढ़ा सकेगा। मौजूदा स्थिति में यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

निर्वाचन आयोग की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं का उल्लेख किए जाने के बाद पंजीकरण की प्रक्रिया पर सभी की नजर है। दूसरी तरफ संगठन का कहना है कि वह चुनाव की तैयारी रोकने वाला नहीं है।

निर्दलीय विकल्प से रास्ता खुला रखने की कोशिश

यदि पंजीकरण समय पर नहीं होता है, तो निर्दलीय उम्मीदवारों के जरिए चुनाव लड़ने की रणनीति संगठन के लिए एक वैकल्पिक रास्ता हो सकती है। मनप्रीत सिंह अयाली ने इसी विकल्प को सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट किया है। इससे संगठन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि ECI की प्रक्रिया लंबित रहने के बावजूद उसकी चुनावी योजना प्रभावित नहीं होगी।

फिलहाल पंजाब की राजनीति में वारिस पंजाब डे की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। एक तरफ संगठन तेजी से अपना विस्तार कर रहा है और उम्मीदवारों के नाम सामने ला रहा है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दल के रूप में उसकी औपचारिक स्थिति अभी निर्वाचन आयोग के फैसले पर निर्भर है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजीकरण का फैसला संगठन की चुनावी रणनीति और उसके उम्मीदवारों की भूमिका को तय करने में अहम साबित होगा।

Tags: