चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम की वीरवार को हुई बैठक में टेबल एजेंडा को लेकर जमकर हंगामा हुआ। बैठक के दौरान कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षदों ने टेबल एजेंडा सदन में नहीं लाए जाने को लेकर विरोध दर्ज कराया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि बिना सदन की मंजूरी के एजेंडा वापस कैसे लिया जा सकता है।

बैठक में विवाद उस समय बढ़ गया जब पार्षदों को जानकारी मिली कि कुछ टेबल एजेंडा सदन में चर्चा के लिए पेश नहीं किए जाएंगे। इसके बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया।

पार्षदों का कहना था कि टेबल एजेंडा सदन की कार्यवाही का हिस्सा होते हैं और इन्हें बिना चर्चा और सदन की अनुमति के वापस नहीं लिया जा सकता। उन्होंने मांग की कि इन एजेंडों को सदन के सामने रखा जाए और सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए।

वहीं, मेयर सौरभ जोशी ने इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि टेबल एजेंडा को वापस ले लिया गया है और इन्हें नगर निगम सदन की अगली बैठक में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगली बैठक में इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

मेयर ने कहा कि एजेंडा को लेकर किसी भी तरह की जल्दबाजी की जरूरत नहीं है। सभी विषयों पर नियमों के अनुसार चर्चा होगी और उचित प्रक्रिया के तहत निर्णय लिया जाएगा।

हालांकि, मेयर की इस सफाई से विपक्षी पार्षद संतुष्ट नहीं हुए। कांग्रेस और आप पार्षदों ने सवाल उठाया कि अगर एजेंडा सदन में चर्चा के लिए लाया जाना था तो उसे पहले ही क्यों वापस लिया गया। उनका कहना था कि सदन की अनुमति के बिना किसी एजेंडे को वापस लेना उचित नहीं है।

विरोध के बीच मेयर सौरभ जोशी ने पार्षदों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर उन्हें एजेंडा की इतनी चिंता है तो वे सदन की बैठक में पूरा समय क्यों नहीं रुकते। उन्होंने कहा कि कई बार चर्चा के समय पार्षद सदन छोड़कर चले जाते हैं।

मेयर ने कहा कि महीने में केवल एक दिन सदन की बैठक होती है और उस दौरान भी कई सदस्य पूरी कार्यवाही में शामिल नहीं रहना चाहते। उन्होंने कहा कि जब महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा का समय आता है तो कई लोग सदन से बाहर चले जाते हैं।

उन्होंने विपक्षी पार्षदों से अपील की कि वे सदन की कार्यवाही में गंभीरता से हिस्सा लें और मुद्दों पर चर्चा के दौरान मौजूद रहें।

दूसरी ओर, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षदों का कहना है कि टेबल एजेंडा को लेकर नगर निगम प्रशासन को पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण मुद्दों को बिना चर्चा के हटाया जा रहा है।

पार्षदों का कहना है कि सदन लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है और हर सदस्य को एजेंडा पर अपनी राय रखने का अधिकार है। इसलिए किसी भी विषय को सदन की मंजूरी के बिना वापस नहीं लिया जाना चाहिए।

नगर निगम की बैठक में हुए इस विवाद के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने इसे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल बताया है, जबकि मेयर ने नियमों के अनुसार काम करने की बात कही है।

नगर निगम की बैठकों में अक्सर विकास कार्यों, शहर की समस्याओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर बहस होती रहती है। लेकिन इस बार टेबल एजेंडा को लेकर हुआ विवाद चर्चा का केंद्र बन गया।

फिलहाल मेयर की ओर से कहा गया है कि हटाए गए टेबल एजेंडा को अगली बैठक में शामिल किया जाएगा। अब देखना होगा कि आने वाली बैठक में इन मुद्दों पर किस तरह चर्चा होती है।

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