चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने राज्य सरकार पर चुनावी वादे से पीछे हटने का आरोप लगाया है।

बाजवा ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने का वादा किया था, लेकिन अब उसे लागू करने के बजाय अंशदायी पेंशन व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कर्मचारियों की उम्मीदों के साथ विश्वासघात है। बाजवा के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना की बहाली को लेकर सरकार से उम्मीदें लगाई थीं, लेकिन अब सरकार की नीति में बदलाव दिखाई दे रहा है।

विपक्ष नेता ने पेंशन व्यवस्था की समीक्षा के लिए गठित समिति के कार्यकाल बढ़ाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि समिति का कार्यकाल चार महीने बढ़ाया जाना यह दिखाता है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से फैसला नहीं ले रही है।

बाजवा ने कहा कि सरकार अब कथित तौर पर ‘गारंटीकृत पेंशन’ व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसमें कर्मचारियों का अंशदान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था को पुरानी पेंशन योजना के समान नहीं माना जा सकता।

पुरानी पेंशन योजना (OPS) और नई पेंशन व्यवस्था को लेकर देश के कई राज्यों में समय-समय पर बहस होती रही है। सरकारी कर्मचारी संगठनों का एक वर्ग OPS की मांग करता रहा है, जबकि सरकारें वित्तीय भार और दीर्घकालिक आर्थिक प्रभावों को ध्यान में रखते हुए पेंशन व्यवस्था पर विचार करती हैं।

बाजवा ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपने चुनावी वादे को पूरा करने और पुरानी पेंशन योजना को लेकर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को लंबे समय से इस मुद्दे पर इंतजार कराया जा रहा है। विपक्ष नेता ने कहा कि पेंशन केवल आर्थिक सुरक्षा का विषय नहीं है, बल्कि यह सरकारी कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।

वहीं, सरकार की ओर से इस मामले में अभी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पेंशन व्यवस्था को लेकर अंतिम निर्णय सरकार और संबंधित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा।

पुरानी पेंशन योजना में सरकारी कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद एक निश्चित पेंशन का प्रावधान होता है, जबकि नई पेंशन व्यवस्था में कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान शामिल होता है। दोनों व्यवस्थाओं को लेकर कर्मचारियों और सरकारों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं।

पंजाब में भी सरकारी कर्मचारी संगठन लंबे समय से OPS लागू करने की मांग उठाते रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर कर्मचारी संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से समय-समय पर आवाज उठाई जाती रही है।

बाजवा के बयान के बाद पंजाब की राजनीति में पेंशन योजना को लेकर बहस और तेज हो गई है। विपक्ष इसे सरकार के चुनावी वादों से जोड़ रहा है, जबकि सरकार की ओर से पेंशन व्यवस्था को लेकर आगे की रणनीति पर फैसला किया जाना बाकी है।

अब नजर इस बात पर है कि पेंशन समीक्षा समिति की रिपोर्ट और सरकार की आगामी कार्रवाई से इस मुद्दे पर क्या दिशा तय होती है। कर्मचारियों के साथ-साथ राजनीतिक दल भी इस फैसले पर नजर बनाए हुए हैं।

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