Punjab की राजनीति में बोतल पर बवाल, रवनीत बिट्टू ने भगवंत मान सरकार को घेरा
लुधियाना : 27 अक्टूबर 2026। पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रवनीत सिंह बिट्टू के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बिट्टू ने शराब की बोतल को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए राज्य में कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या और प्रशासनिक विफलताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने आम आदमी पार्टी की सरकार पर पंजाब की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। बिट्टू का यह विरोध प्रदर्शन 19 सितंबर को लुधियाना में हुआ था, जब उन्होंने मुख्यमंत्री के काफिले के पास शराब की बोतल दिखाकर विरोध जताया था।
शराब की बोतल दिखाकर मुख्यमंत्री पर साधा निशाना
लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के बाहर रवनीत सिंह बिट्टू ने उस समय विरोध प्रदर्शन किया था, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान का काफिला वहां से गुजर रहा था।बिट्टू अपने साथ शराब की एक बोतल, अंडे और टमाटर लेकर पहुंचे थे। उन्होंने बोतल दिखाते हुए मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत और राजनीतिक कटाक्ष किया।भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के शासन में पंजाब की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर भी पंजाब के प्रशासन में हस्तक्षेप करने और राज्य के संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।हालांकि, बिट्टू के ये आरोप राजनीतिक बयान हैं और इन्हें किसी न्यायिक या आधिकारिक जांच का प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया
मुख्यमंत्री के काफिले के पास विरोध प्रदर्शन करने के बाद पंजाब पुलिस ने रवनीत सिंह बिट्टू को हिरासत में ले लिया था।इस घटनाक्रम से एक दिन पहले बिट्टू ने आरोप लगाया था कि बटाला के पास उनके काफिले पर अंडे और टमाटर फेंके गए थे। उनका कहना था कि विरोध प्रदर्शन उसी घटना की प्रतिक्रिया था।बिट्टू ने तर्क दिया कि यदि आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों में विरोध कर सकते हैं, तो भाजपा कार्यकर्ताओं को भी राज्य सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है।इस घटनाक्रम के बाद पंजाब में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच राजनीतिक टकराव चर्चा का विषय बन गया।
नशे की समस्या को लेकर मान सरकार पर गंभीर आरोप
रवनीत सिंह बिट्टू लगातार पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या को लेकर भगवंत मान सरकार को घेर रहे हैं।हाल ही में कपूरथला के सुभानपुर क्षेत्र में दो नाबालिग भाइयों के कथित तौर पर नशे की गिरफ्त में आने की खबर पर उन्होंने चिंता जताई थी।बिट्टू ने आरोप लगाया कि जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, वे नशे की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्य सरकार के नशामुक्त पंजाब अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है।उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ अभियान को प्रभावी बनाने के बजाय प्रचार पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी की सरकार नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा करती रही है।
कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिति पर भी उठाए सवाल
भाजपा नेता ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और आर्थिक स्थिति को लेकर भी मुख्यमंत्री भगवंत मान से जवाब मांगा है।20 अक्टूबर को दिए बयान में बिट्टू ने दावा किया था कि राज्य में कानून-व्यवस्था कमजोर हुई है और आर्थिक चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य की प्रमुख समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं।बिट्टू ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय कर्मचारियों, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
पंजाब विधानसभा को लेकर भी जताई नाराजगी
रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब विधानसभा की कार्यवाही को लेकर आम आदमी पार्टी के साथ कांग्रेस पर भी सवाल उठाए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी कांग्रेस भी सरकार को नशे, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर प्रभावी ढंग से घेरने में विफल रही है।बिट्टू का कहना था कि मुख्यमंत्री को राज्य की वास्तविक समस्याओं पर जवाब देना चाहिए, न कि दूसरे राज्यों के राजनीतिक मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
पंजाब की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
पंजाब में नशे की समस्या, रोजगार, आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में बने हुए हैं।भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू इन मुद्दों के आधार पर भगवंत मान सरकार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि आम आदमी पार्टी की सरकार नशा तस्करी के खिलाफ अपनी कार्रवाई और अन्य सरकारी प्रयासों का हवाला देती रही है।राज्य सरकार के कामकाज पर राजनीतिक आरोपों के बीच वास्तविक स्थिति का आकलन आधिकारिक आंकड़ों, जांच रिपोर्टों और नीतिगत परिणामों के आधार पर करना महत्वपूर्ण होगा।