Punjab.पंजाब: पंजाब के फाजिल्का जिले में बाढ़ प्रभावित सड़कों की हालत अब भी खराब बनी हुई है, जबकि मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए लगभग 132 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया जा चुका है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार न दिखने से स्थानीय लोगों में भारी नाराज़गी है।
पिछले वर्ष आई बाढ़ ने जिले की कई प्रमुख और ग्रामीण सड़कों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। जलभराव और तेज बहाव के कारण कई मार्ग पूरी तरह टूट गए थे, जिससे गांवों का संपर्क शहर से कट गया था। बाढ़ के बाद सरकार ने राहत और मरम्मत कार्यों के लिए भारी बजट जारी किया, लेकिन अब तक अधिकांश सड़कों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई जगहों पर सड़कें इतनी खराब हैं कि रोजमर्रा का सफर भी मुश्किल हो गया है। गड्ढों और टूटी सड़कों के कारण वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी खराब हैं, जहां एंबुलेंस और अन्य आपात सेवाओं का पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने केवल कागजों में ही मरम्मत कार्य दिखाया है, जबकि हकीकत में काम बेहद धीमी गति से चल रहा है या कई जगह शुरू ही नहीं हुआ। कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि जहां काम शुरू हुआ, वहां गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा गया।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मरम्मत कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और जल्द ही सभी प्रभावित सड़कों को ठीक कर दिया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि कुछ स्थानों पर तकनीकी और मौसम संबंधी कारणों से देरी हुई है, लेकिन काम जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मरम्मत के लिए विशेष तकनीक और बेहतर योजना की आवश्यकता होती है। यदि समय पर और सही तरीके से काम नहीं किया गया, तो भविष्य में भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं।
इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने सरकार पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि काम प्रगति पर है और जल्द ही परिणाम दिखाई देंगे।
फिलहाल, फाजिल्का के लोग टूटी सड़कों और अधूरे वादों के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन कब तक इन समस्याओं का समाधान कर पाता है और क्या वास्तव में आवंटित बजट का सही उपयोग हो पाता है या नहीं।