पंजाब में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से राहत, लुधियाना में राशन कार्ड सत्यापन आदेश वापस होगा
चंडीगढ़। पंजाब में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों से दूर रखने को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शिक्षा सचिव सोनाली गिरी ने राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों को निर्देश दिया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों को पढ़ाने के अलावा अन्य प्रशासनिक कामों में न लगाया जाए। इसी बीच लुधियाना जिला प्रशासन की ओर से शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की राशन कार्ड सत्यापन ड्यूटी 30 सितंबर तक बढ़ाए जाने का मामला सामने आया। शिक्षा सचिव ने कहा है कि उन्होंने लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर से बात की है और यह आदेश वापस लिया जाएगा।
शिक्षा विभाग का यह निर्देश ऐसे समय आया है जब पंजाब के सरकारी स्कूलों के शिक्षक लंबे समय से अलग-अलग गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने का मुद्दा उठा रहे हैं। शिक्षकों को चुनाव संबंधी काम, सर्वेक्षण, राशन कार्ड सत्यापन और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां दिए जाने को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि ऐसी ड्यूटी के कारण शिक्षक कक्षाओं से दूर होते हैं और इसका असर पढ़ाई पर पड़ता है।
शिक्षा सचिव ने सभी DC को दिए निर्देश
पंजाब की शिक्षा सचिव सोनाली गिरी ने 18 सितंबर को डिप्टी कमिश्नरों को पत्र जारी कर शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों में लगाने पर रोक लगाने को कहा था। पत्र में कहा गया कि स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षक जिला और उपमंडल स्तर पर लंबे समय तक प्रशासनिक और अन्य गैर-शिक्षण कार्यों में लगाए जा रहे हैं। इससे कक्षा शिक्षण, शैक्षणिक निरंतरता और विद्यार्थियों के सीखने के परिणाम प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि बड़ी संख्या में शिक्षक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े काम में पहले ही लगाए जा चुके हैं। SIR की प्रक्रिया 30 सितंबर को समाप्त होने वाली है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने कहा कि इसके बाद शिक्षकों को उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी यानी स्कूलों में पढ़ाने के काम पर वापस लाया जाना चाहिए।
कानून का भी दिया हवाला
शिक्षा सचिव ने अपने निर्देश में बच्चों के नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 27 का हवाला दिया। इस प्रावधान के तहत शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने पर सामान्य तौर पर रोक है। चुनाव, दशकीय जनगणना और आपदा प्रबंधन से संबंधित कुछ निर्धारित जिम्मेदारियां इसके अपवाद हैं। विभाग ने कहा कि इन कानूनी प्रावधानों और संबंधित न्यायिक निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए।
शिक्षा सचिव ने डिप्टी कमिश्नरों से कहा कि शिक्षकों को सर्वेक्षण, सत्यापन या अन्य ऐसे कार्यों में तैनात न किया जाए, जो कानून के तहत अनुमत नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो शिक्षक पहले से चुनाव संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, उन्हें एक साथ अतिरिक्त जिला स्तर के गैर-संबंधित काम नहीं सौंपे जाने चाहिए।
लुधियाना में फिर बढ़ाई गई राशन कार्ड ड्यूटी
इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लुधियाना जिला प्रशासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को स्मार्ट राशन कार्ड के सत्यापन का काम जारी रखने का आदेश दिया। यह ड्यूटी 30 सितंबर तक बढ़ाई गई। इससे शिक्षकों के बीच एक बार फिर असमंजस की स्थिति पैदा हुई, क्योंकि राज्य शिक्षा विभाग पहले ही गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियों से शिक्षकों को मुक्त करने के निर्देश दे चुका था।
लुधियाना में राशन कार्ड सत्यापन के लिए पहले भी बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल शिक्षकों को लगाया गया था। सितंबर की शुरुआत में जिला प्रशासन ने सैकड़ों शिक्षकों को नए राशन कार्ड के आवेदनों के सत्यापन की जिम्मेदारी दी थी। उस समय भी शिक्षकों और उनके संगठनों ने इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि सरकारी स्कूल पहले से ही स्टाफ की कमी का सामना कर रहे हैं और शिक्षकों को कक्षाओं से हटाने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शिक्षकों ने किया था गैर-शैक्षणिक काम का विरोध
राशन कार्ड सत्यापन ड्यूटी को लेकर पंजाब में शिक्षक संगठनों ने पहले ही विरोध दर्ज कराया था। कई शिक्षकों ने कहा था कि उन्हें बार-बार अलग-अलग सरकारी कामों में लगाया जा रहा है, जबकि उनकी मुख्य जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना है। सितंबर के मध्य में शिक्षक संगठनों ने सरकार को ज्ञापन देकर गैर-शैक्षणिक ड्यूटी खत्म करने की मांग की थी।
कुछ जिलों में राशन कार्ड सत्यापन ड्यूटी पर नहीं पहुंचने वाले शिक्षकों को नोटिस भी जारी किए गए थे। लुधियाना, अमृतसर और बरनाला समेत कुछ स्थानों पर शिक्षकों को कार्रवाई की चेतावनी मिलने की खबर सामने आई थी। इससे विवाद और बढ़ गया था।
अब आदेश वापस लेने की तैयारी
लुधियाना में राशन कार्ड सत्यापन की ड्यूटी बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा सचिव सोनाली गिरी ने कहा कि उन्होंने जिला प्रशासन से बात की है। उनके अनुसार लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर को आदेश वापस लेने के लिए कहा गया है। इससे शिक्षकों को राशन कार्ड सत्यापन जैसे गैर-शैक्षणिक काम से राहत मिलने की उम्मीद है।
राज्य शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षकों को लगातार अलग-अलग प्रशासनिक कार्यों में लगाए जाने से स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है। विभाग की ओर से जारी निर्देशों में शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी को स्पष्ट करते हुए उन्हें विद्यार्थियों की शिक्षा पर ध्यान देने के लिए कहा गया है।
पहले भी कई कामों में लग चुके हैं शिक्षक
पंजाब में सरकारी शिक्षकों को पिछले कुछ समय में कई तरह के गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने का मुद्दा सामने आता रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक शिक्षकों को मतदाता सूची के SIR और BLO से जुड़े कार्यों के अलावा जनगणना, ड्रग सर्वे और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े कामों में भी लगाया गया है। इसी वजह से शिक्षक संगठनों ने बार-बार कहा कि उन्हें स्कूलों में पर्याप्त समय देने दिया जाए।
राशन कार्ड सत्यापन का काम भी इसी विवाद का हिस्सा बन गया। सरकार की ओर से नए राशन कार्ड के आवेदनों की जांच और पात्र लाभार्थियों की पहचान के लिए सत्यापन प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की मदद ली जा रही है। शिक्षा विभाग का रुख है कि इस तरह की जिम्मेदारियों में शिक्षकों की तैनाती कम की जानी चाहिए ताकि वे अपने मूल शैक्षणिक दायित्व निभा सकें।
फिलहाल लुधियाना में राशन कार्ड सत्यापन ड्यूटी को लेकर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के बीच स्थिति साफ होने का इंतजार है। शिक्षा सचिव के हस्तक्षेप के बाद आदेश वापस लिए जाने की बात कही गई है। वहीं राज्य स्तर पर जारी निर्देशों के बाद शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर स्कूलों में पढ़ाई पर ध्यान देने की व्यवस्था लागू करने की कोशिश की जा रही है।