चंडीगढ़: पंजाब में किसान-मजदूर संगठनों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। किसान मजदूर मोर्चा ने आज यानी 31 अगस्त को पंजाब के सभी 22 जिलों में डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालयों के घेराव और एक दिवसीय प्रदर्शन का आह्वान किया है। अलग-अलग जिलों में किसान और मजदूर DC दफ्तरों के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगें प्रशासन के माध्यम से सरकार तक पहुंचाएंगे।
किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में फसलों के लिए
लाभकारी मूल्य
और सरकारी खरीद सुनिश्चित करना शामिल है। किसान लंबे समय से न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP और फसलों की खरीद को लेकर ठोस व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा किसान और खेत मजदूरों के कर्ज से जुड़े मुद्दे को भी प्रदर्शन में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
आंदोलनकारी संगठनों की मांग है कि किसानों और मजदूरों को कर्ज से राहत दी जाए। उनका कहना है कि कृषि लागत बढ़ने और पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण छोटे तथा सीमांत किसानों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में कर्ज के मुद्दे का स्थायी समाधान निकाला जाना चाहिए। पंजाब में पानी का संकट भी किसान संगठनों के एजेंडे में शामिल है। प्रदर्शनकारी राज्य के भूजल और कृषि सिंचाई से जुड़े संकट को देखते हुए दीर्घकालीन जल नीति बनाने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पंजाब के कृषि क्षेत्र को बचाने के लिए पानी के इस्तेमाल और संरक्षण को लेकर प्रभावी नीति जरूरी है।
किसान संगठनों की मांगों में लैंड पूलिंग से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। भूमि अधिग्रहण और किसानों की जमीन से संबंधित नीतियों को लेकर किसान पहले भी विरोध दर्ज कराते रहे हैं। संगठनों का कहना है कि किसानों की सहमति और हितों की अनदेखी करने वाली नीतियों को लागू नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी उठाई जा रही है। संगठनों का कहना है कि आंदोलन में शामिल किसानों और मजदूरों के खिलाफ दर्ज मामलों को सरकार वापस ले और आंदोलनकारियों से जुड़े लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए।
सभी 22 जिलों में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी सतर्क है। DC कार्यालयों के आसपास सुरक्षा और यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए जा सकते हैं। प्रदर्शन एक दिन के लिए प्रस्तावित है और इसके जरिए किसान-मजदूर संगठन सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेना चाहिए। आज के प्रदर्शन के बाद सरकार की प्रतिक्रिया और किसान संगठनों की आगे की रणनीति पर नजर रहेगी।
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