Punjab.पंजाब: खालसा साजना दिवस के पावन अवसर पर दुनिया भर से सिख श्रद्धालु पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर (Harmandir Sahib) में बड़ी संख्या में एकत्र हुए। इस अवसर पर पूरा परिसर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से भर गया, जहां हजारों की संख्या में संगत ने गुरबाणी का श्रवण किया और अरदास में हिस्सा लिया। खालसा साजना दिवस सिख इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, जब खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। हर वर्ष इस दिन को पूरे विश्व में सिख समुदाय बड़े श्रद्धा भाव से मनाता है। इस बार भी देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने स्वर्ण मंदिर में मत्था टेककर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
अमृतसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़नी शुरू हो गई थी। गुरुद्वारा परिसर में विशेष दीवान सजाए गए, जहां कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया। संगत ने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष नतमस्तक होकर शांति, समृद्धि और मानवता के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और स्वयंसेवी संगठनों ने भीड़ नियंत्रण और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, लंगर सेवा में हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया, जो सिख परंपरा की सेवा भावना को दर्शाता है। विदेशों से आए सिख श्रद्धालुओं ने कहा कि खालसा साजना दिवस उनके लिए केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि पहचान और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि स्वर्ण मंदिर में आकर उन्हें आत्मिक शांति और गुरु के प्रति गहरी श्रद्धा का अनुभव होता है।
Harmandir Sahib में इस अवसर पर पूरे परिसर को रोशनी और फूलों से सजाया गया था। रात के समय स्वर्ण मंदिर का दृश्य अत्यंत मनमोहक था, जिसने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, खालसा पंथ की स्थापना ने सिख इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा, जिसने समानता, साहस और सेवा की भावना को मजबूत किया। यह दिवस आज भी उन मूल्यों की याद दिलाता है, जिन पर सिख धर्म आधारित है। फिलहाल, पूरे आयोजन के दौरान माहौल शांतिपूर्ण और भक्तिमय बना रहा। प्रशासन ने भी श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील की और व्यवस्था को सुचारु रूप से बनाए रखने में सफलता हासिल की। इस तरह खालसा साजना दिवस ने एक बार फिर दुनिया भर के सिख समुदाय को एकजुट करते हुए भक्ति, सेवा और एकता का संदेश दिया।