चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में प्रदेश नेतृत्व को लेकर हलचल तेज हो गई है। पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के पद छोड़ने के संकेतों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी की राज्य इकाई की कमान किस नेता को सौंपी जाएगी। वडिंग ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को ‘पूर्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष’ लिखा है, जबकि पार्टी के भीतर नए अध्यक्ष के नाम को लेकर मंथन जारी है।

कांग्रेस नेतृत्व में बदलाव की चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब पंजाब में 2027 की विधानसभा चुनावी तैयारियां तेज हो चुकी हैं। पार्टी इस बार चुनाव से काफी पहले संगठन को व्यवस्थित करने और आंतरिक गुटबाजी को कम करने की कोशिश में जुटी है। वडिंग के कार्यकाल के दौरान पंजाब कांग्रेस में अलग-अलग गुटों के बीच मतभेद कई बार खुलकर सामने आए थे। पार्टी नेतृत्व अब चुनाव से पहले संगठन को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार पंजाब के नए AICC महासचिव और प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट की ओर से पिछले करीब तीन सप्ताह के दौरान जुटाए गए संगठनात्मक फीडबैक के बाद नेतृत्व परिवर्तन का फैसला लिया गया। पायलट ने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें कीं और इसके बाद अपनी रिपोर्ट कांग्रेस हाईकमान को सौंपी।

सचिन पायलट को 5 सितंबर को पंजाब मामलों का प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद से ही पंजाब कांग्रेस के संगठन को लेकर लगातार बैठकें शुरू हुईं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि इन बैठकों में प्रदेश नेतृत्व, संगठन की स्थिति और नेताओं के बीच तालमेल से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

राजा वडिंग 2022 में नवजोत सिंह सिद्धू के बाद पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बने थे। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब की 13 में से सात सीटें जीती थीं। इसके बावजूद प्रदेश संगठन में अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद खत्म नहीं हो पाए। कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी हाईकमान तक अपनी नाराजगी पहुंचाई थी।

कांग्रेस के भीतर लंबे समय से राजा वडिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक खेमों के बीच खींचतान की चर्चा रही है। इसके अलावा कुछ सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रदेश संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी नेतृत्व की चिंता यह थी कि यदि यह स्थिति चुनाव तक बनी रही तो संगठनात्मक स्तर पर नुकसान हो सकता है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान अब ऐसे चेहरे की तलाश में है, जो पार्टी के अलग-अलग गुटों को साथ लेकर चल सके। नेतृत्व परिवर्तन का उद्देश्य केवल प्रदेश अध्यक्ष बदलना नहीं, बल्कि चुनाव से पहले संगठनात्मक संतुलन बनाना भी माना जा रहा है।

नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पूर्व मंत्री और सांसद विजय इंदर सिंगला को संभावित दावेदारों में प्रमुख माना जा रहा है। इसके अलावा परगट सिंह, सुखजिंदर सिंह रंधावा, गुरजीत सिंह औजला और सुखबिंदर सिंह सरकारिया जैसे नेताओं के नाम भी चर्चा में हैं। हालांकि कांग्रेस ने अभी किसी नए अध्यक्ष के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

नए अध्यक्ष का चुनाव करते समय कांग्रेस के सामने क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की चुनौती भी है। पंजाब कांग्रेस में जाट सिख, दलित और हिंदू नेतृत्व के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय से समीकरण बनाए जाते रहे हैं। पार्टी नेतृत्व इस बात पर भी विचार कर रहा है कि नया अध्यक्ष किस क्षेत्र से हो और चुनाव के दौरान किन सामाजिक वर्गों को संदेश दिया जाए।

राजा वडिंग ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच सार्वजनिक रूप से तीखी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा है कि पार्टी में बदलाव संगठन का आंतरिक विषय है। उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदलाव के बाद उनकी विदाई लगभग स्पष्ट हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी अगला अध्यक्ष बने, उसे पार्टी के लिए मजबूती से काम करना चाहिए।

पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती चुनाव से पहले नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बैठाने की है। पंजाब कांग्रेस पिछले कुछ वर्षों से नेतृत्व संबंधी खींचतान से जूझती रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच विवाद लंबे समय तक चर्चा में रहा था। बाद में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई।

अब कांग्रेस नेतृत्व पिछली परिस्थितियों की पुनरावृत्ति से बचना चाहता है। इसी कारण विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष का फैसला जल्द करने की कोशिश की जा रही है, ताकि नए नेतृत्व को संगठन तैयार करने और चुनावी रणनीति पर काम करने के लिए पर्याप्त समय मिले।

सचिन पायलट ने हाल में सार्वजनिक रूप से कहा है कि पंजाब कांग्रेस चुनाव से पहले एकजुट है। दूसरी ओर संगठन में बदलाव की प्रक्रिया यह संकेत देती है कि हाईकमान आंतरिक मतभेदों को चुनाव से काफी पहले सुलझाने की कोशिश कर रहा है।

फिलहाल नजर कांग्रेस हाईकमान की अगली घोषणा पर है। राजा वडिंग के बाद प्रदेश कांग्रेस की कमान किसे मिलेगी, यह फैसला पार्टी की 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण होगा। नए अध्यक्ष के सामने संगठन के विभिन्न गुटों को साथ लाने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी तैयारियों को गति देने की जिम्मेदारी होगी।

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