नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सिरसा ने कहा कि केजरीवाल ने अपने दस साल के शासनकाल में दिल्ली को प्रदूषण की समस्या से बर्बाद कर दिया और अब पंजाब में भी उनकी पार्टी प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर नया इतिहास रच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के बजाय वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।पर्यावरण मंत्री ने दावा किया कि दिल्ली की वर्तमान भाजपा सरकार मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में प्रदूषण कम करने के लिए लगातार काम कर रही है, लेकिन पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं राजधानी की हवा को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार और यहां के लोग प्रदूषण के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जबकि पंजाब सरकार इस गंभीर समस्या को लेकर पर्याप्त जिम्मेदारी नहीं दिखा रही है।
केजरीवाल पर लगाया दिल्ली को बर्बाद करने का आरोप
मनजिंदर सिंह सिरसा ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में करीब दस वर्षों तक शासन किया, लेकिन प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए, जिसके कारण दिल्लीवासियों को लंबे समय तक खराब हवा का सामना करना पड़ा।सिरसा ने कहा कि दिल्ली की मौजूदा सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।उन्होंने केजरीवाल और मनीष सिसोदिया से दिल्ली के हितों को प्राथमिकता देने तथा प्रदूषण के मुद्दे पर राजनीति बंद करने की अपील भी की।
पंजाब में पराली जलाने को लेकर गंभीर आरोप
पर्यावरण मंत्री ने पंजाब की भगवंत मान सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य में पराली जलाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी वास्तविक आंकड़ों को सार्वजनिक करने के बजाय विज्ञापनों के माध्यम से अलग तस्वीर पेश कर रही है।सिरसा ने दावा किया कि 26 अक्टूबर से एक नवंबर 2026 के बीच पंजाब में पराली जलाने की 933 घटनाएं दर्ज की गईं। उन्होंने इन आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिदिन औसतन 133 घटनाएं सामने आईं।उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में विफल रही है। सिरसा के अनुसार, सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर प्रदूषण नियंत्रण में सफलता का दावा कर रही है, जबकि जमीनी स्थिति अलग है।हालांकि, पंजाब सरकार द्वारा जानबूझकर पराली जलवाने संबंधी सिरसा के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पंजाब पुलिस और अधिकारियों पर भी उठाए सवाल
मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि पंजाब में कुछ पुलिसकर्मी और सरकारी अधिकारी भी पराली जलाने की गतिविधियों में शामिल हैं।उन्होंने कहा कि यदि सरकारी कर्मचारी ही पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का उल्लंघन करेंगे, तो किसानों और आम नागरिकों को प्रदूषण रोकने के लिए कैसे प्रेरित किया जा सकेगा।सिरसा ने पंजाब सरकार से इन आरोपों पर जवाब मांगा और पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई।ये आरोप राजनीतिक बयान के रूप में सामने आए हैं। संबंधित अधिकारियों की कथित संलिप्तता स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नियुक्ति पर विवाद
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में रीना गुप्ता की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए।उन्होंने दावा किया कि रीना गुप्ता पहले आम आदमी पार्टी की दिल्ली इकाई से जुड़ी थीं और उन्हें पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया।सिरसा ने आरोप लगाया कि इस नियुक्ति के पीछे प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों को प्रभावित करने की मंशा हो सकती है। उन्होंने बोर्ड जैसी महत्वपूर्ण संस्था में नियुक्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।हालांकि, नियुक्ति के पीछे आंकड़ों में हेरफेर करने की मंशा संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली में 220 दिन बेहतर हवा का दावा
पर्यावरण मंत्री सिरसा ने कहा कि वर्ष 2026 में दिल्ली ने वायु गुणवत्ता के मामले में महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया है।उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष अब तक दिल्ली में 220 ऐसे दिन दर्ज हुए, जब हवा की गुणवत्ता पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रही। साथ ही अक्टूबर 2026 को पिछले दस वर्षों का सबसे स्वच्छ अक्टूबर बताया।सिरसा के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक में पिछले वर्षों की तुलना में लगभग दस प्रतिशत सुधार हुआ है।उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में उठाए गए कदमों और दिल्लीवासियों के सहयोग को दिया। हालांकि, वायु गुणवत्ता में बदलाव पर मौसम, बारिश और हवा की गति जैसे कारकों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार को घेरा
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भी दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं।आप नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार को प्रदूषण की समस्या के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। पार्टी ने दिल्ली के खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक को लेकर सरकार की जवाबदेही पर जोर दिया है।आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने भी प्रदूषण के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा है। दोनों दलों के बीच प्रदूषण के कारणों और उससे निपटने के उपायों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
दिल्ली में प्रदूषण की समस्या क्यों बनी हुई है?
दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर हो जाती है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार माने जाते हैं।वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना और आसपास के राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभाती हैं।इसके अलावा सर्दियों में हवा की गति कम होने और तापमान में बदलाव के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण की निचली परतों में जमा होने लगते हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, इस समस्या का स्थायी समाधान केवल एक राज्य के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित संबंधित राज्यों के बीच समन्वय आवश्यक है।
प्रदूषण पर सियासत तेज, जनता को राहत का इंतजार
मनजिंदर सिंह सिरसा के ताजा बयान के बाद दिल्ली और पंजाब की राजनीति में प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।भाजपा जहां आम आदमी पार्टी पर प्रदूषण नियंत्रण में विफल रहने का आरोप लगा रही है, वहीं आप वर्तमान दिल्ली सरकार से प्रभावी कार्रवाई की मांग कर रही है।राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच दिल्लीवासियों के लिए सबसे बड़ी चिंता स्वच्छ हवा और स्वास्थ्य सुरक्षा की है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी नीतियों, उनके वास्तविक परिणामों और अंतरराज्यीय सहयोग पर ध्यान देना आवश्यक होगा।
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