Ludhiana.लुधियाना: पंजाब के Punjab Agricultural University (PAU) में गिल मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने वर्षा आधारित खेती (Rainfed Agriculture) से जुड़ी चुनौतियों और संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने भाग लिया और बदलते मौसम, जलवायु परिवर्तन तथा खेती पर इसके प्रभावों पर विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने बताया कि बारिश पर निर्भर खेती आज भी कई क्षेत्रों में किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है, लेकिन अनिश्चित मौसम इसे चुनौतीपूर्ण बना रहा है। व्याख्यान के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के पैटर्न में बदलाव आया है, जिससे किसानों को फसल उत्पादन में अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों और जल संरक्षण उपायों को अपनाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि सूखा, अत्यधिक बारिश और मौसम की अनिश्चितता जैसे कारक खेती की उत्पादकता को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में किसानों को बेहतर बीज, सिंचाई प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान तकनीकों की जानकारी देना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में यह भी चर्चा हुई कि कृषि अनुसंधान संस्थानों को ऐसे फसल किस्मों के विकास पर ध्यान देना चाहिए जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दे सकें। साथ ही, किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
PAU के अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के व्याख्यान छात्रों और शोधकर्ताओं को कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर देते हैं और उन्हें समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में मौजूद प्रतिभागियों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी हस्तक्षेप से ही वर्षा आधारित खेती को अधिक स्थिर और लाभकारी बनाया जा सकता है। कुल मिलाकर, PAU में आयोजित गिल मेमोरियल लेक्चर ने वर्षा आधारित खेती की चुनौतियों पर महत्वपूर्ण चर्चा को मंच प्रदान किया। यह कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में सतत विकास और जलवायु अनुकूल खेती की दिशा में जागरूकता बढ़ाने का एक अहम प्रयास साबित हुआ।