Punjab पंजाब: पंजाब में कर्मचारियों की मांगों को लेकर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच खींचतान जारी है। कर्मचारी यूनियन नेता जगदीश ठाकुर ने मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले साढ़े चार साल में मुख्यमंत्री के साथ कई बैठकें हुईं, लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया। अमृतसर में मीडिया से बातचीत के दौरान जगदीश ठाकुर ने कहा कि बीते दिन की घटना को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक तय की गई थी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को उम्मीद थी कि बातचीत के जरिए उनकी मांगों का समाधान निकलेगा, लेकिन अब तक की बैठकों का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
यूनियन नेता ने कहा कि पिछले साढ़े चार साल में मुख्यमंत्री के साथ करीब नौ बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं और मांगें सरकार के सामने रखीं, लेकिन किसी भी बैठक में कोई बड़ा समाधान नहीं निकल सका। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से हर बार आश्वासन दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और अब उन्हें ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
जगदीश ठाकुर ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों में सेवा संबंधी मुद्दे, वेतन से जुड़े मामले और अन्य लंबित समस्याएं शामिल हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन केवल बैठकें करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को बैठकों में लिए गए फैसलों को लागू भी करना होगा।
कर्मचारी नेता ने कहा कि अगर सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी लंबे समय तक नहीं की जा सकती। वहीं, पंजाब सरकार की ओर से इस मामले पर अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार पहले भी दावा करती रही है कि वह कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
पंजाब में विभिन्न कर्मचारी संगठन समय-समय पर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली आगामी बातचीत पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल कर्मचारी यूनियन ने साफ कर दिया है कि केवल आश्वासन से बात नहीं बनेगी और मांगों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ने की संभावना है।
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