Mansa पंजाब सरकार के एक उच्च स्तरीय पैनल और नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को न्याय दिलाने के लिए गठित एक्शन कमेटी के बीच उनकी हत्या के छह दिन बाद सोमवार को पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही। बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली और इसमें एक्शन कमेटी के सदस्यों, झोटा के पिता भीम सिंह और उनकी पत्नी मनप्रीत कौर ने भाग लिया।
सरकारी प्रतिनिधिमंडल में तीन महिला आईएएस अधिकारी, आवास और शहरी विकास विभाग में विशेष सचिव अपनीत रियात, फरीदकोट संभागीय आयुक्त कंवल प्रीत बराड़, मनसा की उपायुक्त नवजोत कौर और दो आईपीएस अधिकारी, डीआइजी बठिंडा रेंज हरजीत सिंह और मनसा एसएसपी वैभव चौधरी शामिल थे। एआईजी काउंटर इंटेलिजेंस अवनीत कौर सिद्धू भी मौजूद रहीं।
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए रियात ने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवार की बात सुनी और मनप्रीत से एक ज्ञापन प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि परिवार के साथ दूसरे दौर की बातचीत से पहले राज्य सरकार के साथ मांगों पर चर्चा की जाएगी।
रियात ने कहा कि प्रशासन उठाए गए मुद्दों पर विचार करेगा, जिसमें पुलिस और स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई, एक स्टेडियम में एक स्मारक प्रतिमा, मृतक के नाम पर एक ट्रॉमा सेंटर और मौजूदा क्रिकेट मैदान का नाम उसके नाम पर रखना शामिल है। परिवार ने घटना में घायल हुए लोगों के इलाज और मुआवजे की भी मांग की है। बैठक में घटना पर पुलिस की प्रतिक्रिया पर भावनात्मक आदान-प्रदान भी हुआ। जब पुलिस की सतर्कता का जिक्र किया गया तो पूर्व सैनिक भीम सिंह ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, "यह पुलिस की सतर्कता नहीं बल्कि लापरवाही है। अगर पुलिस इतनी सतर्क थी, तो वे मेरे बेटे की जान क्यों नहीं बचा सके?"