Jalandhar.जालंधर: पुष्पा गुजराल साइंस सिटी ने हाल ही में एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया, जिसका विषय था “खेलों में बौद्धिक संपदा (IPR) की भूमिका।” इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, खेल पेशेवरों और विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों को IPR यानी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स के महत्व के बारे में जागरूक करना था।
सेमिनार में विशेषज्ञों ने खेलों में बौद्धिक संपदा के महत्व, जैसे पेटेंट, ट्रेडमार्क, कॉपीराइट और डिज़ाइन राइट्स, पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे तकनीकी नवाचार, खेल उपकरण और खेल से जुड़ी डिज़ाइन को IPR के माध्यम से सुरक्षित किया जा सकता है।
साइंस सिटी के निदेशक ने उद्घाटन सत्र में कहा, “खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह विज्ञान, तकनीक और नवाचार का एक बड़ा क्षेत्र भी है। खेलों में होने वाले नए आविष्कार और तकनीकी विकास को सुरक्षा देने के लिए IPR बहुत महत्वपूर्ण है। हम चाहते हैं कि युवा वैज्ञानिक और खिलाड़ी इसके महत्व को समझें।”
कार्यक्रम में छात्रों और खेल प्रशिक्षकों ने भी भाग लिया। विशेषज्ञों ने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि कैसे IPR खिलाड़ियों, कोचों और खेल कंपनियों को अपने उत्पाद और तकनीक की सुरक्षा में मदद करता है। उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक स्तर पर खेल उद्योग में बौद्धिक संपदा का क्या महत्व है और यह खिलाड़ियों और नवप्रवर्तनकर्ताओं की आय में कैसे योगदान करता है।
IPR विशेषज्ञों ने कहा कि खेलों में तकनीकी नवाचार, जैसे स्मार्ट जूते, फिटनेस ट्रैकर्स और नई खेल तकनीक, यदि बौद्धिक संपदा द्वारा सुरक्षित न हों, तो उनके कॉपी और दुरुपयोग का खतरा रहता है। सेमिनार में प्रतिभागियों को IPR के आवेदन और प्रक्रियाओं पर भी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर विज्ञान और खेल शिक्षा को जोड़ने पर भी जोर दिया गया। छात्रों को प्रेरित किया गया कि वे खेलों में नवाचार करें और अपने आविष्कारों को बौद्धिक संपदा के तहत सुरक्षित करें। इसके अलावा, खिलाड़ियों को भी बताया गया कि उनके प्रशिक्षण तकनीक और खेल उपकरण पर अधिकार बनाए रखने के लिए IPR का सहारा कैसे लिया जा सकता है।
कार्यक्रम का समापन सवाल-जवाब सत्र और प्रतिभागियों के विचार साझा करने के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने कहा कि इस तरह के सेमिनार से न केवल ज्ञान बढ़ता है, बल्कि खेल और विज्ञान के बीच संबंध भी मजबूत होता है।