चंडीगढ़  चाहे 1992 हो या 2026, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) दशकों से विवादों में घिरा रहा है। इन विवादों में जमीन की खरीद, व्हिसलब्लोअर्स (भंडाफोड़ करने वाले) और एसोसिएशन के पदाधिकारियों के खिलाफ की गई शिकायतें शामिल हैं। यह सब तब हुआ है, जब इस राज्य ने क्रिकेट इतिहास के कई अहम आयोजनों की मेजबानी भी की है। ICC विश्व कप मैचों की मेजबानी करने से लेकर कई उपलब्धियां हासिल करने तक, PCA ने अलग-अलग सरकारों, नेतृत्व में बदलाव और मौजूदा व पूर्व क्रिकेटरों के योगदान के साथ एक लंबा सफर तय किया है। हालांकि, विवादों ने इस संस्था का पीछा नहीं छोड़ा है।
ताजा मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जुड़ा है, जिसने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर अमृतसर और बठिंडा में स्टेडियम बनाने के लिए जमीन की खरीद में हुए कथित घोटाले के संबंध में FIR दर्ज करने को कहा है। आरोप है कि यह जमीन 'बहुत ऊंची' कीमतों पर खरीदी गई थी। वैसे, PCA के लिए जमीन खरीद से जुड़े विवाद कोई नई बात नहीं हैं। साल 2019 में, मुल्लांपुर में 'महाराजा यादवेंद्र सिंह PCA इंटरनेशनल स्टेडियम' के लिए जमीन अधिग्रहण में कथित घोटाले का खुलासा हुआ था। आरोप था कि एक ट्रस्ट ने - जिसके सदस्य PCA के एक पूर्व पदाधिकारी थे - बाजार भाव से कहीं अधिक कीमत पर लगभग 36 एकड़ जमीन खरीदी और बाद में उसे PCA को बेच दिया।
दावा किया गया कि ट्रस्ट की ओर से लगभग 70 चेक के जरिए भुगतान किया गया था। स्टेडियम 42 एकड़ जमीन पर बनना था, लेकिन ट्रस्ट के जरिए केवल 36 एकड़ जमीन खरीदे जाने पर सवाल उठे। यह भी आरोप लगाया गया कि 2010 में ट्रस्ट ने यह जमीन PCA को 42 करोड़ रुपये में बेची थी। संबंधित पदाधिकारी ने दावा किया था कि PCA जमीन का मालिकाना हक चाहता था और वे 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (अधिकार पत्र) हासिल करने की प्रक्रिया में शामिल थे, जिसके बाद बिना किसी भुगतान के जमीन का हस्तांतरण कर दिया गया।
समय के साथ ये आरोप दब गए, क्योंकि स्टेडियम में क्रिकेट की शुरुआत हो गई और वहां ODI, टेस्ट और T20 इंटरनेशनल मैचों का आयोजन भी हुआ। मोहाली स्थित 'IS बिंद्रा PCA स्टेडियम' भी मालिकाना हक को लेकर विवादों में रहा है। कहा जाता है कि यह स्टेडियम 1992 में पंजाब स्पोर्ट्स काउंसिल (PSC) से लीज पर ली गई जमीन पर बनाया गया था। 2006 में, PSC ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और 150 करोड़ रुपये की मांग की। उनका दावा था कि PCA ने 1992 से इतनी कमाई की है। इसके अलावा, उन्होंने हर्जाने के तौर पर 50 करोड़ रुपये की भी मांग की। 2009 में, पंजाब विधानसभा की एक समिति ने सरकार से कहा कि वह स्टेडियम को अपने नियंत्रण में ले ले और 13.56 एकड़ जमीन के हस्तांतरण से जुड़े समझौते को रद्द कर दे।
जमीन से परे विवाद
PCA से जुड़े विवाद सिर्फ जमीन की खरीद तक ​​ही सीमित नहीं रहे हैं। 2014 में, 36 वर्षों तक अध्यक्ष रहे व्यक्ति के इस्तीफे के बाद, गवर्निंग बॉडी में जगह बनाने की होड़ तेज हो गई। पिछले साल, पंजाब के एक पूर्व क्रिकेटर पर आरोप लगे कि उन्होंने PCA में अपने परिवार के सदस्यों को बढ़ावा दिया और किट की खरीद में भी उनकी कथित संलिप्तता रही। पिछले कुछ वर्षों में, कई अन्य विवाद भी सामने आए हैं—जैसे पदाधिकारियों को हटाना या उनका इस्तीफा देना, परिवार के सदस्यों और करीबी रिश्तेदारों को शामिल करना, और PCA के लोकपाल-सह-नैतिकता अधिकारी (Ombudsman-cum-Ethics Officer) द्वारा PCA के CEO को इस्तीफा देने या तुरंत पद से हटाए जाने का सामना करने का आदेश देना।
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