अमृतसर कांग्रेस रैली में फिर दिखी गुटबाजी, चन्नी खेमे की मौजूदगी रही चर्चा का विषय
अमृतसर। रखड़ पुन्निया मेले के अवसर पर अमृतसर के बाबा बकाला साहिब में कांग्रेस की ओर से आयोजित रैली में पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सामने आती नजर आई। रैली के मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ माझा क्षेत्र के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग गुट के नेताओं की अनुपस्थिति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।
रैली का उद्देश्य जहां पार्टी की एकजुटता और जनसंपर्क को मजबूत करना बताया जा रहा था, वहीं मंच पर नेताओं की मौजूदगी और अनुपस्थिति ने कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी को फिर से उजागर कर दिया।
चन्नी के साथ दिखे माझा के कई बड़े नेता
बाबा बकाला साहिब में आयोजित इस रैली में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ माझा क्षेत्र के कई दिग्गज कांग्रेस नेता मंच पर नजर आए।
मंच पर पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, राणा गुरजीत सिंह और पूर्व विधायक रमनजीत सिंह सिक्की समेत कई प्रमुख नेता मौजूद रहे।
इन नेताओं की मौजूदगी से यह संदेश देने की कोशिश की गई कि माझा क्षेत्र में चन्नी की पकड़ अभी भी मजबूत है।
राजा वड़िंग गुट की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
रैली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग गुट के नेताओं की मौजूदगी दिखाई नहीं दी।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के बीच प्रभाव और नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है।
रैली के मंच पर एक गुट की प्रमुखता और दूसरे गुट की गैरमौजूदगी ने पार्टी की अंदरूनी स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
पोस्टरों में भी दिखी चन्नी खेमे की प्रमुखता
रैली स्थल पर लगे पोस्टरों और प्रचार सामग्री में भी चन्नी खेमे के नेताओं की प्रमुखता नजर आई।
मंच की व्यवस्था और नेताओं की उपस्थिति को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा होती रही।
कई लोगों का कहना था कि रैली में पार्टी की एकजुटता दिखाने के बजाय नेताओं के बीच चल रही खेमेबाजी ज्यादा दिखाई दी।
कांग्रेस के लिए चुनौती बनी अंदरूनी राजनीति
पंजाब में कांग्रेस लंबे समय से संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है।
विधानसभा चुनावों में पार्टी को मिली हार के बाद संगठन को मजबूत करने और नेताओं के बीच तालमेल बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।
लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली गुटबाजी पार्टी के लिए चिंता का कारण बनती रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पार्टी के वरिष्ठ नेता एकजुट होकर काम नहीं करते हैं तो इसका असर आगामी चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।
चन्नी की सक्रियता बढ़ी
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पिछले कुछ समय से पंजाब की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
वह लगातार जन मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला करते रहे हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं।
बाबा बकाला साहिब की रैली में वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी को उनके राजनीतिक प्रभाव के रूप में भी देखा जा रहा है।
माझा क्षेत्र में प्रभाव की लड़ाई
पंजाब की राजनीति में माझा क्षेत्र का विशेष महत्व माना जाता है।
यह क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस के लिए मजबूत आधार रहा है। ऐसे में यहां आयोजित रैली में कौन से नेता मौजूद रहते हैं, यह राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जाता है।
चन्नी के साथ माझा के कई नेताओं की मौजूदगी ने क्षेत्र में उनके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
कार्यकर्ताओं में भी रही चर्चा
रैली में शामिल कार्यकर्ताओं के बीच भी नेताओं की मौजूदगी और अनुपस्थिति को लेकर बातचीत होती रही।
कुछ कार्यकर्ताओं ने इसे सामान्य राजनीतिक गतिविधि बताया, जबकि कुछ ने इसे पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों का संकेत माना।
हालांकि कांग्रेस नेताओं की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे की रणनीति पर नजर
रैली के बाद अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस पंजाब में संगठन को किस तरह आगे बढ़ाती है।
पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेताओं के बीच तालमेल बनाना और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना है।
बाबा बकाला साहिब की रैली ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी समीकरण अभी पूरी तरह संतुलित नहीं हुए हैं।