चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और आम आदमी पार्टी के पूर्व रणनीतिकार व राज्यसभा सांसद संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। वहीं पंजाब से जुड़े वरिष्ठ नेता तरुण चुघ को केंद्रीय कार्यालय प्रभारी बनाए रखा गया है। इन नियुक्तियों को पंजाब में भाजपा की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
मनप्रीत सिंह बादल पंजाब की राजनीति का पुराना और जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह पांच बार विधायक रह चुके हैं और प्रदेश के वित्त मंत्री के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने पंजाब का बजट कई बार पेश किया है। शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस में लंबी राजनीतिक पारी खेलने के बाद वह 2023 में भाजपा में शामिल हुए थे। अब उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाकर भाजपा ने संकेत दिया है कि पार्टी पंजाब में उनके राजनीतिक अनुभव और सिख चेहरे का इस्तेमाल बड़े स्तर पर करना चाहती है।
मनप्रीत बादल को आगे करने के पीछे भाजपा की नजर खास तौर पर सिख और ग्रामीण मतदाताओं पर मानी जा रही है। पंजाब में भाजपा की पारंपरिक ताकत शहरी और हिंदू बहुल इलाकों में अधिक रही है। अकाली दल के साथ गठबंधन के दौर में ग्रामीण और सिख वोटों तक पहुंचने में सहयोगी दल की महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। अब भाजपा स्वतंत्र रूप से अपना सामाजिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। मनप्रीत बादल को प्रमुख सिख चेहरे के रूप में राष्ट्रीय संगठन में जगह दिए जाने को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
मनप्रीत की पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। वह पंजाब के प्रभावशाली बादल परिवार से आते हैं और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के चचेरे भाई हैं। हालांकि उनकी राजनीतिक यात्रा अलग-अलग दलों से होकर गुजरी है, लेकिन मालवा क्षेत्र की राजनीति और पंजाब के ग्रामीण सामाजिक समीकरणों की उनकी समझ भाजपा के लिए उपयोगी हो सकती है। भाजपा ने हाल में साफ किया है कि वह 2027 का पंजाब विधानसभा चुनाव सभी 117 सीटों पर अपने दम पर लड़ने की तैयारी कर रही है और फिलहाल शिरोमणि अकाली दल के साथ चुनावी गठबंधन की संभावना से इनकार किया गया है। ऐसे में पार्टी को ग्रामीण पंजाब में अपना संगठन और स्वतंत्र जनाधार दोनों बढ़ाने होंगे।
इसी रणनीति का दूसरा महत्वपूर्ण चेहरा संदीप पाठक हैं। पाठक पहले आम आदमी पार्टी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकारों में शामिल थे और 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में AAP की जीत की रणनीति तैयार करने वाले अहम नेताओं में गिने जाते हैं। अप्रैल 2026 में वह अन्य AAP राज्यसभा सांसदों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे। अब उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।
संदीप पाठक की सबसे बड़ी राजनीतिक उपयोगिता पंजाब की चुनावी और संगठनात्मक संरचना की उनकी गहरी समझ मानी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक AAP में रहते हुए उन्होंने पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत काम किया था और पार्टी विधायकों तथा संगठन के नेताओं से उनके मजबूत संपर्क रहे हैं। भाजपा उन्हें 2027 के चुनाव में महत्वपूर्ण बैकरूम रणनीतिकार के रूप में इस्तेमाल कर सकती है।
इससे भाजपा को दोहरा फायदा मिलने की संभावना देखी जा रही है। एक तरफ पाठक को आम आदमी पार्टी के संगठन, चुनावी अभियान और उसकी राजनीतिक कार्यशैली की जानकारी है, वहीं दूसरी ओर उन्हें बूथ स्तर की रणनीति और चुनावी डेटा पर काम करने का अनुभव भी है। 2022 में पंजाब में AAP को मिली बड़ी जीत के पीछे जिन रणनीतिक चेहरों का उल्लेख हुआ था, उनमें पाठक प्रमुख थे। अब वही अनुभव भाजपा के लिए कितना कारगर साबित होगा, यह 2027 का चुनाव बताएगा। भाजपा पंजाब में संगठनात्मक स्तर पर भी बदलाव कर रही है। प्रदेश में 36 जिला प्रभारियों की नियुक्तियों में बदलाव किया गया है और दूसरे दलों से भाजपा में आए नेताओं को भी जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसे चुनाव से पहले आंतरिक मतभेद कम करने और स्थानीय स्तर पर संगठन मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है।
पंजाब में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्रामीण और किसान बहुल क्षेत्रों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की होगी। किसान आंदोलन और कृषि कानूनों के बाद बने राजनीतिक माहौल का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसके साथ ही पार्टी को AAP, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के बीच अपनी अलग राजनीतिक जगह बनानी होगी।
मनप्रीत बादल और संदीप पाठक की जोड़ी इसी चुनौती का जवाब तलाशने की कोशिश दिखाई देती है। मनप्रीत के जरिए भाजपा अनुभवी सिख नेतृत्व, ग्रामीण पहुंच और मालवा के समीकरणों पर काम कर सकती है, जबकि पाठक के जरिए चुनाव प्रबंधन, डेटा, बूथ नेटवर्क और AAP की रणनीतिक कमजोरियों को समझने की कोशिश हो सकती है। तरुण चुघ जैसे पुराने संगठनात्मक चेहरे के साथ इन दोनों नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना पंजाब पर भाजपा के बढ़े फोकस को दिखाता है।
हालांकि इन नियुक्तियों को सीधे वोटों में बदलना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। पंजाब की राजनीति में स्थानीय मुद्दे, किसान राजनीति, धार्मिक-सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय पहचान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए मनप्रीत बादल की राजनीतिक स्वीकार्यता और संदीप पाठक की चुनावी रणनीति की असली परीक्षा विधानसभा चुनाव में ही होगी। फिलहाल भाजपा की नई टीम से इतना संकेत जरूर मिलता है कि पार्टी 2027 के पंजाब चुनाव को गंभीरता से लेते हुए अपनी पुरानी शहरी सीमा से बाहर निकलने की कोशिश कर रही है। मनप्रीत बादल के राजनीतिक अनुभव और संदीप पाठक की चुनावी रणनीति का मेल अगर जमीन पर असर दिखाता है तो पंजाब में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
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