चंडीगढ़: अपनी दिवंगत पत्नी की पेंशन का बकाया पाने के लिए करीब 17 साल से सरकारी दफ्तरों और बैंक के चक्कर काट रहे 80 वर्षीय जगदीश राज अरोड़ा को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), जिला कोषाधिकारी (DTO) और बैंक ऑफ इंडिया के दो अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाने का आदेश दिया है। यह रोक अदालत की पूर्व अनुमति के बिना वेतन निकालने पर लागू रहेगी।

मामला जगदीश राज अरोड़ा की दिवंगत पत्नी सुदर्शन कुमारी की पेंशन के बकाया भुगतान से जुड़ा है। सुदर्शन कुमारी गुरदासपुर-द्वितीय में ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं। याचिकाकर्ता के मुताबिक उनकी पत्नी की पेंशन का बकाया वर्ष 2007 से लंबित था। भुगतान हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करने के बावजूद संबंधित विभाग और बैंक के बीच मामला उलझा रहा।
जगदीश राज अरोड़ा ने आखिरकार वर्ष 2023 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी की पीठ ने की। अदालत के सामने सरकारी पक्ष ने बताया कि अकाउंटेंट जनरल पंजाब के कार्यालय ने सितंबर 2012 में जिला कोषाधिकारी को आवश्यक पत्र जारी किया था, लेकिन बैंक ऑफ इंडिया की ओर से उसे लागू नहीं किया गया।
दूसरी ओर बैंक की तरफ से कहा गया कि जिला कोषाधिकारी के स्तर पर कुछ आवश्यक अनुपालन नहीं किए जाने के कारण पेंशन बकाया जारी नहीं किया जा सका। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि बुजुर्ग याचिकाकर्ता को मिलने वाले बकाया के अधिकार को लेकर कोई विवाद नहीं है, इसके बावजूद उन्हें वर्षों तक भुगतान के लिए भटकना पड़ा। अदालत ने अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके याचिकाकर्ता को अपने वैध अधिकार के लिए एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक चक्कर लगाने पड़े। अदालत के अनुसार संबंधित पक्ष अब तक ऐसी कोई कानूनी बाधा नहीं बता सके, जिसके कारण पेंशन का बकाया जारी नहीं किया जा सकता था।
इसके बाद हाई कोर्ट ने पंजाब के स्कूल शिक्षा विभाग और वित्त विभाग के सचिवों को निर्देश दिया कि गुरदासपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) और जिला कोषाधिकारी अदालत की पूर्व अनुमति के बिना अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे। इसी तरह बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर को संबंधित सीनियर मैनेजर और गुरदासपुर शाखा के ब्रांच मैनेजर के वेतन पर भी अदालत की अनुमति तक रोक सुनिश्चित करने को कहा गया है।
हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा है और अनुपालन के लिए 26 नवंबर की समयसीमा तय की है। अदालत के इस आदेश से स्पष्ट है कि पेंशन जैसे वैध वित्तीय अधिकारों के भुगतान में विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने को गंभीरता से लिया जा सकता है। अब संबंधित विभाग और बैंक को पेंशन बकाया के मामले का समाधान कर अदालत के सामने अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करनी होगी। करीब 17 वर्षों से लंबित इस मामले में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 80 वर्षीय जगदीश राज अरोड़ा को राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
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