CITU के वरिष्ठ नेता बिष्णु मोहंती का निधन, ओडिशा के मजदूर आंदोलन में बड़ी क्षति
Odisha ओडिशा: भुवनेश्वर में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) के ऑल इंडिया वाइस प्रेसिडेंट और वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता बिष्णु मोहंती का आज सुबह निधन हो गया। वे 74 वर्ष के थे। उनका निधन भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उन्होंने सुबह करीब 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से डायबिटीज से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे और चिकित्सकीय देखरेख में थे।
बिष्णु मोहंती को ओडिशा के मजदूर और ट्रेड यूनियन आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा माना जाता था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र आंदोलन से की थी। वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) से जुड़े रहे और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। अपने छात्र जीवन में उन्होंने राउरकेला गवर्नमेंट कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर तीन बार और राउरकेला लॉ कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष पद पर भी तीन कार्यकालों तक जिम्मेदारी संभाली।
सुंदरगढ़ जिले से आने वाले बिष्णु मोहंती छात्र राजनीति में एक मजबूत नेता के रूप में पहचाने जाते थे। आपातकाल के दौरान 1975 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था और वे लगभग 24 महीने तक जेल में रहे। इसके बाद उन्होंने मजदूर आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई और कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया।
उन्होंने तालचेर-बिमलागढ़ रेलवे आंदोलन और राउरकेला में कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स के आंदोलन जैसे कई महत्वपूर्ण श्रमिक आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाई। इन आंदोलनों के कारण उन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन वे मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई में लगातार सक्रिय रहे।
बाद के वर्षों में वे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिवालय के वरिष्ठ सदस्य बने। उन्होंने ओडिशा में CITU के महासचिव और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। अपने लंबे राजनीतिक और ट्रेड यूनियन करियर के दौरान उन्होंने राज्य और जिले के कई श्रमिक संगठनों का नेतृत्व किया और विभिन्न पदों पर रहकर संगठन को मजबूत किया।
उनके निधन की खबर से मजदूर संगठनों और वामपंथी राजनीतिक हलकों में शोक की लहर फैल गई है। विभिन्न नेताओं और संगठनों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है और इसे मजदूर आंदोलन के लिए एक बड़ी क्षति बताया है।
बिष्णु मोहंती का जीवन संघर्ष, संगठनात्मक नेतृत्व और मजदूर अधिकारों के प्रति समर्पण के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने दशकों तक मजदूरों और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती दी और ओडिशा के श्रमिक आंदोलन को नई दिशा प्रदान की।
उनके निधन से ट्रेड यूनियन आंदोलन में एक महत्वपूर्ण युग का अंत माना जा रहा है।