भुवनेश्वर। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की हवाई यात्राओं से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद प्रशासनिक जरूरत और सरकारी खर्च को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश दास को सूचना का अधिकार कानून के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने जुलाई 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच कुल 119 बार हेलीकॉप्टर और हवाई जहाज का इस्तेमाल किया। इनमें 64 यात्राएं हेलीकॉप्टर से और 55 यात्राएं विमान से की गईं।
आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में मुख्यमंत्री की प्रदेश के विभिन्न जिलों और राज्य से बाहर की यात्राएं शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री के गृह जिले क्योंझर यानी केंदुझर के लिए सबसे अधिक हेलीकॉप्टर यात्राएं की गईं। इसके अलावा भुवनेश्वर से कटक, पुरी और जगतसिंहपुर जैसे नजदीकी स्थानों तक जाने के लिए भी हेलीकॉप्टर के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है।
आरटीआई से मिले आंकड़े जुलाई 2024 से अक्टूबर 2025 तक लगभग 16 महीने की अवधि से संबंधित हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री के स्तर पर कई सरकारी कार्यक्रम, प्रशासनिक बैठकें और अन्य यात्राएं हुईं। उपलब्ध जानकारी में 119 हवाई यात्राओं की संख्या बताई गई है, लेकिन प्रत्येक यात्रा का उद्देश्य, दूरी और उस पर हुए खर्च का पूरा विवरण सामने नहीं आया है।
सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश दास की ओर से प्राप्त की गई इस जानकारी के बाद सवाल उठाया जा रहा है कि नजदीकी स्थानों के लिए हेलीकॉप्टर का उपयोग किस प्रशासनिक आवश्यकता के तहत किया गया। भुवनेश्वर से कटक और पुरी जैसे स्थान सड़क मार्ग से भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में हवाई साधन के उपयोग को लेकर इसकी जरूरत और लागत पर चर्चा शुरू हो गई है।
हालांकि मुख्यमंत्री की प्रत्येक यात्रा को केवल दूरी के आधार पर नहीं देखा जा सकता। कई बार एक ही दिन में अलग-अलग कार्यक्रमों में शामिल होने, आपात स्थिति का जायजा लेने, समय बचाने या सुरक्षा कारणों से हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किया जाता है। प्राकृतिक आपदा, प्रशासनिक समीक्षा और संवेदनशील इलाकों के दौरे में भी हवाई यात्रा आवश्यक हो सकती है।
मुख्यमंत्री राज्य का प्रमुख प्रशासनिक पद होता है और उन्हें सीमित समय में अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों, बैठकों तथा निरीक्षणों में हिस्सा लेना पड़ता है। ऐसी स्थिति में यात्रा का माध्यम तय करते समय दूरी के साथ समय, सुरक्षा, कार्यक्रमों की संख्या और सड़क की स्थिति जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
आरटीआई से सामने आए आंकड़ों को लेकर मुख्य सवाल यात्रा की कुल संख्या के साथ सार्वजनिक खर्च की पारदर्शिता का है। सरकारी हेलीकॉप्टर या किराए के विमान के इस्तेमाल में उड़ान शुल्क, ईंधन, चालक दल, रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च होता है। इसलिए नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि सार्वजनिक धन का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने संबंधित अवधि में 64 बार हेलीकॉप्टर का उपयोग किया। विमान के इस्तेमाल की संख्या 55 रही। दोनों को मिलाकर कुल 119 यात्राएं दर्ज की गईं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रत्येक यात्रा एक तरफ की उड़ान के रूप में गिनी गई है या आने-जाने को एक ही यात्रा माना गया है। इस संबंध में विस्तृत यात्रा विवरण से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
मुख्यमंत्री के गृह जिले क्योंझर के लिए सबसे अधिक हेलीकॉप्टर यात्राएं दर्ज होने के कारण विपक्ष और सामाजिक संगठनों की ओर से सवाल उठने की संभावना है। इसके बावजूद केवल यात्रा की संख्या से उसके औचित्य पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यह जानना भी आवश्यक होगा कि ये यात्राएं सरकारी कार्यक्रमों, विकास कार्यों की समीक्षा, जनसभाओं या अन्य प्रशासनिक उद्देश्यों से संबंधित थीं।
कटक, पुरी और जगतसिंहपुर जैसी अपेक्षाकृत नजदीकी जगहों के लिए हेलीकॉप्टर के उपयोग ने विशेष रूप से ध्यान खींचा है। आलोचकों का तर्क हो सकता है कि सड़क मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद हवाई यात्रा से अनावश्यक खर्च बढ़ता है। दूसरी ओर, सरकार समय की बचत, सुरक्षा और एक दिन में कई कार्यक्रमों में उपस्थिति को इसके कारण के रूप में सामने रख सकती है।
सरकार की ओर से इस आरटीआई जानकारी और उठ रहे सवालों पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही यात्राओं के उद्देश्य तथा प्रशासनिक आवश्यकता की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी। यदि सरकार यात्रा की तारीख, स्थान, उद्देश्य और खर्च का विवरण सार्वजनिक करती है तो इससे बहस को तथ्यात्मक आधार मिल सकता है।
पारदर्शिता के लिहाज से मुख्यमंत्री सहित सभी उच्च पदस्थ अधिकारियों की सरकारी यात्राओं का लेखा-जोखा महत्वपूर्ण होता है। सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल निर्धारित नियमों और स्वीकृत प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए। आरटीआई कानून इसी प्रकार की सूचनाओं तक नागरिकों की पहुंच सुनिश्चित करता है और सार्वजनिक खर्च पर जवाबदेही मजबूत करने का माध्यम बनता है।
आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों को लेकर यह भी देखना होगा कि कितनी यात्राएं नियमित उड़ानों से, कितनी चार्टर्ड विमान से और कितनी हेलीकॉप्टर से की गईं। इसी तरह संबंधित उड़ानों का कुल खर्च, भुगतान करने वाला विभाग और यात्रा का आधिकारिक उद्देश्य जैसे विवरण भी बहस के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जुलाई 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हेलीकॉप्टर और विमान का कुल 119 बार उपयोग किया। इनमें हेलीकॉप्टर यात्राओं की संख्या 64 और विमान यात्राओं की संख्या 55 बताई गई है। गृह जिले के साथ कई नजदीकी स्थानों तक हवाई यात्रा किए जाने के दावे ने प्रशासनिक जरूरत और सार्वजनिक खर्च पर सवाल खड़े किए हैं।
सरकारी यात्राएं आवश्यक थीं या इनमें कुछ यात्राओं से बचा जा सकता था, इसका निष्पक्ष आकलन विस्तृत आधिकारिक विवरण के आधार पर ही संभव होगा। आरटीआई से सामने आई सूचना ने फिलहाल सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही पर चर्चा को तेज कर दिया है।