पुरी जगन्नाथ रथयात्रा: सुबह 9:30 बजे होगी पहंडी, शाम 4 बजे से शुरू होगा रथ खींचना

जगन्नाथ रथयात्रा की पहंडी सुबह, रथ खींचने की प्रक्रिया शाम से शुरू

Update: 2026-07-16 02:31 GMT

ODISHA: पवित्र शहर पुरी में आज विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथयात्रा का आयोजन पूरे धार्मिक उत्साह और पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया जाएगा। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने पुरी पहुंच चुके हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, सुबह 9:30 बजे से 'पहंडी' अनुष्ठान शुरू होगा, जबकि शाम 4 बजे से रथ खींचने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

रथयात्रा भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की वार्षिक यात्रा है, जिसे हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है।
सुबह 9:30 बजे शुरू होगी पहंडी
रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और आकर्षक अनुष्ठान 'पहंडी' होता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को पारंपरिक शैली में श्रीमंदिर के गर्भगृह से बाहर लाकर उनके-अपने भव्य रथों पर विराजमान कराया जाता है।
ढोल-नगाड़ों, शंखध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार और "जय जगन्नाथ" के जयघोष के बीच सेवायत विशेष परंपरा के अनुसार भगवानों को झूमते हुए रथ तक लेकर आते हैं। इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु घंटों पहले से मंदिर परिसर और ग्रैंड रोड पर जुट जाते हैं।
शाम 4 बजे से शुरू होगी रथ खींचने की प्रक्रिया
मंदिर प्रशासन के कार्यक्रम के अनुसार, सभी धार्मिक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद शाम 4 बजे से तीनों रथों को खींचने की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस दौरान सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ, उसके बाद देवी सुभद्रा और अंत में भगवान जगन्नाथ का रथ गुंडिचा मंदिर की ओर रवाना होगा। श्रद्धालु विशाल रस्सियों के माध्यम से रथों को खींचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त होना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।
तीन भव्य रथों की विशेषता
रथयात्रा के लिए हर वर्ष नए लकड़ी के रथ तैयार किए जाते हैं—
भगवान जगन्नाथ – नंदीघोष रथ
भगवान बलभद्र – तालध्वज रथ
देवी सुभद्रा – दर्पदलन रथ
इन रथों का निर्माण पारंपरिक विधि और शास्त्रीय मानकों के अनुसार विशेष प्रकार की लकड़ी से किया जाता है।
छेरा पहरा की परंपरा
पहंडी के बाद पुरी के गजपति महाराज द्वारा 'छेरा पहरा' की रस्म निभाई जाएगी। इस दौरान वे स्वर्ण झाड़ू से तीनों रथों की सफाई करते हैं। यह परंपरा इस बात का प्रतीक है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और सेवा सबसे बड़ा धर्म है।
लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे
रथयात्रा में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचे हैं। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख मार्गों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। होटल, धर्मशालाएं और आश्रम श्रद्धालुओं से भरे हुए हैं।
सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
मुख्य व्यवस्थाएं—
हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती।
ड्रोन कैमरों से हवाई निगरानी।
सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार मॉनिटरिंग।
भीड़ नियंत्रण के लिए बैरिकेडिंग।
मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस।
आपदा प्रबंधन और अग्निशमन दल की तैनाती।
कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि—
निर्धारित मार्गों का पालन करें।
सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
भीड़ में धैर्य बनाए रखें।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें।
आपात स्थिति में हेल्पलाइन और सहायता केंद्र से संपर्क करें।
रथयात्रा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है, की यात्रा पर निकलते हैं। वहां नौ दिनों तक प्रवास करने के बाद तीनों देवता बहुदा यात्रा के माध्यम से वापस श्रीमंदिर लौटते हैं।
यह यात्रा भगवान और भक्त के प्रत्यक्ष मिलन का प्रतीक मानी जाती है, क्योंकि इस अवसर पर भगवान स्वयं मंदिर से बाहर आकर सभी श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं।

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