भुवनेश्वर। ओडिशा के उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में छात्रों के लिए बनने वाले भोजन को लेकर नया निर्देश जारी किया है। विभाग ने कॉलेज प्रशासन से कहा है कि हॉस्टल और कैंटीन में खाना बनाने के दौरान कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल कम किया जाए और ज्यादा तेल वाली खाद्य सामग्री बनाने से बचा जाए।
विभाग का यह निर्देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद आया है, जिसमें उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित चुनौतियों के बीच लोगों से छोटे-छोटे प्रयासों के जरिए योगदान देने की अपील की थी।
कॉलेजों को जारी किया गया पत्र
उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों के प्रिंसिपलों को पत्र भेजकर तेल की खपत कम करने के लिए कदम उठाने को कहा है।
पत्र में कॉलेजों को सुझाव दिया गया है कि वे अपने हॉस्टल और कैंटीन संचालकों को निर्देश दें कि छात्रों के लिए भोजन तैयार करते समय कम मात्रा में कुकिंग ऑयल का इस्तेमाल किया जाए।
विभाग ने कहा है कि तेल की बचत के साथ-साथ छात्रों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
पूरी और वड़ा जैसी चीजों से बचने की सलाह
उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों से कहा है कि हॉस्टल और कैंटीन में पूरी, वड़ा और बोंडा जैसी अधिक तेल में तैयार होने वाली चीजों को कम किया जाए।
इन खाद्य पदार्थों में ज्यादा मात्रा में तेल का इस्तेमाल होता है, इसलिए इनकी जगह कम तेल में बनने वाले पौष्टिक विकल्पों को बढ़ावा देने की सलाह दी गई है।
विभाग का कहना है कि भोजन की गुणवत्ता और पोषण बनाए रखते हुए तेल की खपत को नियंत्रित किया जा सकता है।
डीप फ्राइड खाने में कमी लाने पर जोर
विभाग ने कॉलेजों को निर्देश दिया है कि डीप फ्राइड यानी ज्यादा तेल में तले हुए खाद्य पदार्थों की मात्रा कम की जाए।
हालांकि, विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि खाने के पोषण स्तर से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए।
छात्रों को संतुलित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी है।
वैश्विक आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए पहल
यह निर्देश ऐसे समय में जारी किया गया है, जब दुनिया के कई हिस्सों में आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
सरकार का उद्देश्य है कि रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े संसाधनों की बचत की जाए और लोग अपने स्तर पर छोटे कदम उठाकर योगदान दें।
कुकिंग ऑयल की खपत कम करना इसी दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
छात्रों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान
कॉलेजों में बड़ी संख्या में छात्र हॉस्टल में रहते हैं और उनका भोजन कैंटीन पर निर्भर होता है।
ऐसे में ज्यादा तेल वाले भोजन का नियमित सेवन स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
विभाग का मानना है कि कम तेल और पौष्टिक भोजन छात्रों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा।
कॉलेजों को करनी होगी निगरानी
उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज प्रशासन से कहा है कि वह हॉस्टल और कैंटीन में इस निर्देश का पालन सुनिश्चित करें।
प्रिंसिपलों को कैंटीन संचालकों के साथ समन्वय बनाकर भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में बदलाव करने को कहा गया है।
कॉलेजों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि छात्रों को स्वाद के साथ स्वास्थ्यवर्धक भोजन भी मिले।
छात्रों को मिलेगा संतुलित भोजन
विशेषज्ञों के अनुसार, कम तेल में तैयार भोजन न केवल संसाधनों की बचत करता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है।
कॉलेजों में यदि इस तरह की व्यवस्था लागू होती है तो छात्रों की खान-पान की आदतों में भी सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
विभाग की पहल पर नजर
फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्देश के बाद कॉलेज प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि कॉलेज हॉस्टल और कैंटीन में इन निर्देशों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
सरकार की कोशिश है कि छोटे स्तर पर किए गए ऐसे प्रयास बड़े बदलाव में योगदान दे सकें।