ओडिशा STF का शिकंजा, गांजा तस्करी नेटवर्क के तीन आरोपी गिरफ्तार

Update: 2026-07-28 10:07 GMT

भुवनेश्वर : ओडिशा क्राइम ब्रांच की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। STF ने डेटा आधारित अभियान शुरू करते हुए ओडिशा और अन्य राज्यों में सक्रिय संगठित ड्रग्स नेटवर्क की पहचान, निगरानी और उन्हें खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

इसी अभियान के तहत STF ने राजस्थान के एक कथित ड्रग सिंडिकेट से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, ये लोग गांजा तस्करी के नेटवर्क से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। कार्रवाई के दौरान STF ने तलाशी अभियान चलाया, जिसमें 3.86 लाख रुपये नकद बरामद किए गए।

STF अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में सक्रिय अंतर-राज्यीय ड्रग तस्करी गिरोहों पर नजर रखने के लिए तकनीकी और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया जा रहा है। डेटा विश्लेषण के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों, तस्करी के रास्तों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि ड्रग तस्करी अब केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कई राज्यों में फैले संगठित नेटवर्क के जरिए इसे संचालित किया जाता है। ऐसे में तस्करों तक पहुंचने के लिए राज्यों के बीच समन्वय और आधुनिक जांच तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी हो गया है।

STF की इस कार्रवाई को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की जा रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और तस्करी के पूरे ढांचे का पता लगाया जा सके।

तलाशी के दौरान बरामद नकदी को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। STF यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह रकम ड्रग्स की खरीद-बिक्री से जुड़ी है या नहीं। इसके अलावा आरोपियों के वित्तीय लेन-देन और अन्य संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

ओडिशा लंबे समय से गांजा तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्गों में शामिल रहा है। राज्य के कुछ दूरदराज और वन क्षेत्रों से मादक पदार्थों की तस्करी कर उन्हें दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के मामले सामने आते रहे हैं। इसी वजह से STF ने ऐसे नेटवर्क पर विशेष निगरानी बढ़ाई है।

अधिकारियों के अनुसार, ड्रग तस्करी से जुड़े मामलों में केवल स्थानीय स्तर के तस्करों को पकड़ना पर्याप्त नहीं है। इसके पीछे काम करने वाले बड़े नेटवर्क, आर्थिक सहयोगियों और सप्लाई चैन को तोड़ना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से STF अब नेटवर्क आधारित जांच पर जोर दे रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए खुफिया जानकारी, तकनीकी निगरानी और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संगठित गिरोह अक्सर नए रास्तों और तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए जांच एजेंसियों को भी अपनी रणनीति लगातार बदलनी पड़ती है।

STF की ओर से संकेत दिए गए हैं कि आने वाले दिनों में ऐसे नेटवर्क के खिलाफ और कार्रवाई की जा सकती है। एजेंसी का लक्ष्य न केवल तस्करों को गिरफ्तार करना है, बल्कि ड्रग्स की सप्लाई चेन को पूरी तरह कमजोर करना भी है।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर STF अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि राजस्थान के इस कथित सिंडिकेट का ओडिशा में किन लोगों से संपर्क था और यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था।

ओडिशा पुलिस और क्राइम ब्रांच की यह कार्रवाई राज्य में बढ़ती मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के प्रयासों का हिस्सा है। अधिकारियों का कहना है कि युवाओं को नशे से बचाने और ड्रग नेटवर्क को खत्म करने के लिए ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

STF की ताजा कार्रवाई से यह साफ है कि एजेंसियां अब ड्रग तस्करी के खिलाफ पारंपरिक जांच के साथ-साथ डेटा और तकनीक आधारित रणनीति अपना रही हैं। आने वाले समय में इस अभियान के तहत और गिरफ्तारियां तथा खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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