ओडिशा में हेरिटेज संरक्षण को बढ़ावा, IIT खड़गपुर और SPA भोपाल के साथ MoU साइन
Odisha ओडिशा: ओडिशा राज्य पुरातत्व विभाग ने शुक्रवार को ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी खड़गपुर और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) भोपाल के साथ नॉन-फाइनेंशियल मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए। ये समझौते राज्य की ऐतिहासिक और पुरातात्विक संपत्तियों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से किए गए हैं।
यह कार्यक्रम भुवनेश्वर स्थित संस्कृति भवन में आयोजित किया गया, जहां ओडिशा के संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज और संस्कृति विभाग तथा दोनों शैक्षणिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर इन समझौतों को औपचारिक रूप से लागू किया गया और सहयोग की रूपरेखा पर चर्चा की गई।
इस MoU के तहत विशेष रूप से IIT खड़गपुर के साथ तकनीकी सहयोग को लेकर कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इनमें LiDAR स्कैनिंग, 3D डॉक्यूमेंटेशन, GIS-आधारित मैपिंग, रिमोट सेंसिंग और स्ट्रक्चरल एनालिसिस जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों की मदद से राज्य की हेरिटेज साइट्स का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण और निगरानी की जाएगी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित करना और उनके अध्ययन को और अधिक सटीक बनाना है। साथ ही, यह सहयोग पुरातत्व क्षेत्र में शोध, नवाचार और बहु-विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देगा।
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर भोपाल के साथ हुए समझौते के तहत हेरिटेज साइट्स के प्लानिंग, डिजाइन और संरक्षण रणनीतियों पर काम किया जाएगा, जिससे पारंपरिक धरोहरों को संरक्षित रखते हुए उनके विकास की दिशा तय की जा सके।
संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यह साझेदारी राज्य के पुरातात्विक स्थलों को वैश्विक मानकों के अनुरूप संरक्षित करने में मदद करेगी। इससे न केवल ऐतिहासिक इमारतों और स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उनके डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किए जा सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक और अकादमिक संस्थानों के सहयोग से हेरिटेज संरक्षण के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। इससे शोधकर्ताओं और छात्रों को भी अध्ययन और प्रशिक्षण के बेहतर अवसर मिलेंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि ओडिशा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है, और ऐसे समझौतों के माध्यम से इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, यह MoU ओडिशा में हेरिटेज संरक्षण के क्षेत्र में तकनीक और शिक्षा के सहयोग से एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है, जिससे राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को वैज्ञानिक और आधुनिक तरीके से संरक्षित किया जा सकेगा।