कटक। ओडिशा हाई कोर्ट ने गायक सौरिन भट्ट के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट (NBW) पर लगाई गई अपनी पिछली रोक हटा दी है। अदालत ने निचली अदालत के समक्ष पेश होने के निर्देश का पालन नहीं करने पर भट्ट के प्रति नाराजगी जताई। हाई कोर्ट ने निचली अदालत को मामले में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक और कड़े कदम उठाने का निर्देश दिया है।

यह मामला उस समय सामने आया जब कटक की एसडीजेएम अदालत ने सौरिन भट्ट के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद भट्ट ने इस वारंट को चुनौती देते हुए ओडिशा हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने उस समय NBW पर रोक लगाते हुए उन्हें निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

23 नवंबर 2023 को जारी हुआ था NBW

मामले के अनुसार, कटक की एसडीजेएम अदालत ने 23 नवंबर 2023 को सौरिन भट्ट के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। वारंट जारी होने के बाद भट्ट ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर इसे चुनौती दी।

हाई कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए NBW के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। साथ ही उन्हें निर्देश दिया गया था कि वे निचली अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करें।

अदालत के इस निर्देश के बाद भट्ट की ओर से उनके अधिवक्ता ने आश्वासन दिया था कि वह निर्धारित समय सीमा के भीतर निचली अदालत में सरेंडर कर देंगे।

20 अगस्त से पहले पेश होने का दिया था आश्वासन

सुनवाई के दौरान सौरिन भट्ट के वकील ने हाई कोर्ट को बताया था कि भट्ट 20 अगस्त से पहले निचली अदालत में आत्मसमर्पण कर देंगे। इस आश्वासन के आधार पर NBW पर लगी रोक जारी रही।

हालांकि, निर्धारित समय बीतने के बावजूद भट्ट निचली अदालत के समक्ष पेश नहीं हुए। इस तथ्य को हाई कोर्ट के संज्ञान में लाया गया। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए उनके रवैये पर नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने माना कि जब किसी व्यक्ति को अदालत के समक्ष पेश होने का स्पष्ट निर्देश दिया गया हो और उसकी ओर से अदालत को आश्वासन भी दिया गया हो, तो उस निर्देश का पालन किया जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने हटाई NBW पर रोक

निचली अदालत में पेश नहीं होने के बाद हाई कोर्ट ने सौरिन भट्ट को दी गई राहत को आगे जारी रखने से इनकार कर दिया। अदालत ने उनके खिलाफ जारी NBW पर लगी पिछली रोक हटा दी।

इसका सीधा मतलब है कि अब निचली अदालत द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत को यह भी निर्देश दिया कि वह मामले में भट्ट की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उचित कड़े कदम उठाए।

अदालत के आदेश का पालन जरूरी

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट का मुख्य जोर न्यायिक प्रक्रिया के पालन पर रहा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी आरोपी या पक्षकार को राहत दिए जाने के बाद उसके द्वारा अदालत के निर्देशों का पालन करना आवश्यक है।

किसी व्यक्ति को निचली अदालत में पेश होने का अवसर देने के बावजूद यदि वह निर्धारित समय में उपस्थित नहीं होता है, तो अदालत उसके खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर सकती है।

सौरिन भट्ट के मामले में भी हाई कोर्ट ने पहले उन्हें निचली अदालत के समक्ष सरेंडर करने का अवसर दिया था। उनके अधिवक्ता द्वारा समय सीमा के भीतर पेश होने का आश्वासन दिए जाने के बावजूद ऐसा नहीं हुआ। इसी वजह से हाई कोर्ट ने पहले मिली राहत वापस ले ली।

अब निचली अदालत में पेशी अहम

NBW पर लगी रोक हटाए जाने के बाद अब इस मामले में सौरिन भट्ट की निचली अदालत के समक्ष उपस्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद एसडीजेएम अदालत उनकी पेशी सुनिश्चित करने के लिए कानून के तहत आवश्यक कदम उठा सकती है।

यह मामला न्यायिक निर्देशों के पालन और अदालत के समक्ष समय पर उपस्थित होने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अदालत द्वारा दिए गए निर्देशों की अनदेखी करने पर पहले मिली राहत समाप्त की जा सकती है।

फिलहाल, हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद मामले की अगली प्रक्रिया कटक की एसडीजेएम अदालत में आगे बढ़ेगी। वहां भट्ट की उपस्थिति और उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट के संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रकार, ओडिशा हाई कोर्ट ने सौरिन भट्ट को मिली अंतरिम राहत वापस लेते हुए NBW पर लगी रोक हटा दी है और निचली अदालत को उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने को कहा है।

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