केंद्रपाड़ा। ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में मंगलवार सुबह मगरमच्छ के कथित हमले में 56 वर्षीय महिला की मौत हो गई। घटना महाकालपाड़ा ब्लॉक के खरिनासी गांव के पास बहने वाली गालिया नदी में हुई। मृत महिला की पहचान खरिनासी निवासी हेमलता दास के रूप में हुई है। वह स्वर्गीय समर दास की पत्नी थीं। घटना के बाद नदी किनारे बसे गांवों के लोगों में दहशत का माहौल है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हेमलता दास मंगलवार सुबह करीब आठ बजे गांव के पास स्थित खेतों की ओर गई थीं। इसी दौरान वह गालिया नदी के किनारे पहुंचीं। आशंका जताई जा रही है कि नदी के पास मौजूद मगरमच्छ ने अचानक उन पर हमला कर दिया और उन्हें खींचकर गहरे पानी में ले गया। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों को इसकी जानकारी मिलने पर गांव में अफरा-तफरी मच गई।

महिला के नदी में लापता होने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने उनकी तलाश शुरू की। ग्रामीण नदी किनारे और आसपास के पानी में काफी देर तक खोजबीन करते रहे। काफी प्रयास के बाद हेमलता को पानी से बाहर निकाला गया। उनकी स्थिति गंभीर थी। स्थानीय लोग उन्हें तत्काल रामनगर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक स्तर पर उनकी स्थिति को देखते हुए उच्च चिकित्सा केंद्र ले जाने की सलाह दी गई।

इसके बाद हेमलता दास को केंद्रपाड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। महिला की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिवार में मातम छा गया। गांव के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं। नदी किनारे मगरमच्छ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

स्थानीय स्तर पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि महिला संभवतः शौच के लिए नदी किनारे गई थीं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए हेमलता किस उद्देश्य से नदी के पास पहुंची थीं, इसे लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। इतना बताया गया है कि वह सुबह खेतों की ओर निकली थीं और बाद में नदी में मगरमच्छ के हमले की शिकार हो गईं।

गालिया नदी महानदी नदी तंत्र की एक शाखा बताई जाती है। यह क्षेत्र नदियों, खाड़ियों और दलदली जलस्रोतों से घिरा हुआ है। केंद्रपाड़ा जिले में भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान और उसके आसपास खारे पानी के मगरमच्छ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। नदी तंत्र आपस में जुड़ा होने के कारण मगरमच्छ कई बार संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलकर गांवों के पास स्थित नदियों और नालों तक पहुंच जाते हैं।

मानसून और बाढ़ के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने पर मगरमच्छों के नए क्षेत्रों में पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है। पानी फैलने से नदी, नाले, तालाब और खेत आपस में जुड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में मगरमच्छ मानव बस्तियों के आसपास दिखाई दे सकते हैं। नदी किनारे रहने वाले लोग नहाने, कपड़े और बर्तन धोने, मछली पकड़ने तथा अन्य दैनिक जरूरतों के लिए जलस्रोतों पर निर्भर रहते हैं, जिससे मानव और वन्यजीव के आमने-सामने आने का खतरा बना रहता है।

केंद्रपाड़ा में इससे पहले भी मगरमच्छों के हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अगस्त में जिले की नदियों के आसपास अलग-अलग घटनाओं में लोगों को मगरमच्छ द्वारा खींचे जाने की रिपोर्ट मिली थी। ऐसी घटनाओं को देखते हुए वन विभाग ने बाढ़ प्रभावित और नदी किनारे बसे गांवों के लिए अलर्ट जारी किया था। लोगों को मगरमच्छ दिखाई देने पर तत्काल संबंधित विभाग को सूचना देने और असुरक्षित घाटों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई थी।

 नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद केंद्रपाड़ा के कई गांवों में मगरमच्छों के पहुंचने का खतरा बढ़ गया था। अधिकारियों ने ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान चलाने और सुरक्षित स्थानों का ही उपयोग करने की अपील की थी। इसके बावजूद नदियों पर दैनिक निर्भरता के कारण ग्रामीणों के लिए खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

खरिनासी के पास हुई ताजा घटना के बाद स्थानीय लोग नदी किनारे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर सकते हैं। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित स्नान घाट बनाए जाने से जोखिम कम किया जा सकता है। ग्रामीणों को सुबह जल्दी, देर शाम और रात के समय अकेले नदी किनारे नहीं जाने की सलाह भी दी जाती है, क्योंकि इन अवधियों में पानी में मौजूद मगरमच्छ आसानी से नजर नहीं आते।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मगरमच्छ पानी की सतह के नीचे छिपकर अपने शिकार का इंतजार कर सकते हैं। इसलिए केवल पानी शांत दिखाई देने से उसे सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए। नदी किनारे पशुओं को ले जाना, पानी में उतरना या असुरक्षित घाटों का इस्तेमाल करना जानलेवा साबित हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों को अकेले नदी के पास भेजने से भी बचना चाहिए।

हेमलता दास की मौत ने एक बार फिर नदी किनारे बसे लोगों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का जीवन और आजीविका जलस्रोतों से जुड़ी है, जबकि यही जलस्रोत मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास भी हैं। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों के लिए सुरक्षित घाट, पेयजल और स्वच्छता की वैकल्पिक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।

घटना से संबंधित वन विभाग या प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आने के बाद ही मगरमच्छ की प्रजाति, हमले की सटीक परिस्थितियों और सहायता संबंधी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उपलब्ध प्रारंभिक विवरण के अनुसार महिला की मौत नदी में मगरमच्छ के हमले के बाद हुई बताई जा रही है।

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