भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने सोमवार को सोशल मीडिया और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म पर आने वाले चक्रवात 'अर्नब' के बारे में बिना पुष्टि वाली, भ्रामक और अटकलों पर आधारित जानकारी फैलने पर गहरी चिंता जताई है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी आधिकारिक मौसम बुलेटिन और SRC (विशेष राहत आयुक्त) तथा जिला प्रशासन की सलाह पर ही भरोसा करें।
ओडिशा के विशेष राहत आयुक्त (SRC) कार्यालय ने सोमवार को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए चक्रवात से जुड़ी गलत, भ्रामक और अटकलों पर आधारित भविष्यवाणियां या चेतावनियां फैलाने से मना किया गया है।
SRC ने कहा, "यह देखा गया है कि कुछ लोग और खुद को मौसम विशेषज्ञ बताने वाले कुछ व्यक्ति, बिना किसी वैज्ञानिक आधार या IMD की आधिकारिक भविष्यवाणियों का हवाला दिए, चक्रवात के रास्ते, उसके टकराने की जगह, समय और उसके प्रभाव के बारे में मनगढ़ंत बातें फैला रहे हैं।"
एडवाइजरी में चेतावनी दी गई है कि बिना पुष्टि वाली और सनसनीखेज भविष्यवाणियां लोगों के बीच घबराहट पैदा कर सकती हैं। इससे किसान समय से पहले ही अपनी फसल काट सकते हैं, लोग घबराकर जरूरत से ज्यादा सामान खरीद सकते हैं, जमाखोरी हो सकती है, कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है और कीमतें बढ़ सकती हैं। साथ ही, यह भी कहा गया है कि अलग-अलग तरह की भ्रामक चेतावनियां जनता को उलझन में डाल सकती हैं और सरकार द्वारा की जा रही तैयारियों, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने (इवैक्यूएशन) और आपातकालीन राहत कार्यों में बाधा डाल सकती हैं।
SRC, IMD और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर आपदा से जुड़ी आधिकारिक एडवाइजरी जारी करता है और पूरे राज्य में तैयारियों, लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत कार्यों का समन्वय करता है।
SRC ने सलाह दी है, "सभी व्यक्तियों, मीडिया संगठनों, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अनुरोध है कि वे चक्रवात या मौसम की अन्य गंभीर घटनाओं से जुड़ी जानकारी देते समय पूरी सावधानी बरतें और जिम्मेदारी से काम लें। उन्हें ऐसी कोई भी गलत, भ्रामक, सनसनीखेज या वैज्ञानिक आधार के बिना की गई भविष्यवाणी नहीं फैलानी चाहिए, जिससे लोगों में घबराहट पैदा हो।"
मीडिया संगठनों, कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया गया है कि वे मौसम से जुड़ी किसी भी जानकारी को फैलाने से पहले, IMD के आधिकारिक बुलेटिन या SRC और अन्य सक्षम अधिकारियों द्वारा जारी एडवाइजरी से उसकी पुष्टि जरूर कर लें। सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 54 (गलत चेतावनी) और धारा 51 (अधिकृत अधिकारी के काम में बाधा डालना) के तहत, मौसम के बारे में बिना पुष्टि वाली या गुमराह करने वाली जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
SRC ने चेतावनी दी है कि, "जो लोग जानबूझकर आपदा की झूठी चेतावनी फैलाते हैं, जनता के बीच घबराहट पैदा करते हैं, या आपदा प्रबंधन के आधिकारिक कार्यों में बाधा डालते हैं, उनके खिलाफ सरकार कानून और तय प्रक्रियाओं के अनुसार उचित कानूनी कार्रवाई करेगी।"
इस एडवाइजरी में नागरिकों से कहा गया है कि वे IMD के आधिकारिक बुलेटिन, SRC और जिला प्रशासन की सलाह पर ही भरोसा करें। साथ ही, सोशल मीडिया पर चक्रवात के रास्तों, संदेशों या डरावनी भविष्यवाणियों को बिना पुष्टि किए आगे न भेजने की चेतावनी दी गई है।
SRC ने सलाह दी है कि, "मीडिया संगठनों को चक्रवात से जुड़ी खबरों को देते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। भविष्यवाणियों के लिए आधिकारिक स्रोतों का स्पष्ट उल्लेख करना चाहिए और केवल अटकलों पर आधारित भविष्यवाणियों को पक्की चेतावनी के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। स्वतंत्र मौसम विश्लेषकों के साथ होने वाली चर्चाओं से आधिकारिक भविष्यवाणियों या आपातकालीन निर्देशों को लेकर कोई भ्रम पैदा नहीं होना चाहिए।"
सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स को चेतावनी दी गई है कि वे चक्रवात के फर्जी रास्ते, लैंडफॉल (चक्रवात के तट से टकराने) के बारे में गुमराह करने वाली भविष्यवाणियां, प्रभाव का बढ़ा-चढ़ाकर किया गया आकलन या आपदा से जुड़े झूठे अलर्ट न फैलाएं। कानून लागू करने वाली एजेंसियों और साइबर अपराध विभाग से कहा गया है कि वे आपदा की झूठी चेतावनियां जानबूझकर फैलाने वालों पर कड़ी नजर रखें और संबंधित कानूनों के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई करें।
SRC ने कहा कि आपदा का प्रभावी प्रबंधन करने के लिए सही जानकारी, समय पर चेतावनी और जनता का सही सहयोग बहुत जरूरी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आपदा के बारे में झूठी या गुमराह करने वाली चेतावनी देकर जनता के बीच घबराहट पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।