New Delhi, नई दिल्ली : भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( एनएचआरसी ) ने ओडिशा के रायगढ़ जिले में एक अनुसूचित जनजाति (एसटी) महिला के अनुसूचित जाति के व्यक्ति से विवाह के बाद उसके परिवार के सामाजिक बहिष्कार से संबंधित एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है ।
कथित घटना को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन करार देते हुए एनएचआरसी ने ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गांव वालों ने परिवार को समुदाय में पुनः स्वीकार करने के लिए एक शर्त के रूप में "शुद्धिकरण अनुष्ठान" लागू किया।
इस अनुष्ठान में कथित तौर पर परिवार के 40 पुरुष सदस्यों के सिर जबरन मुंडवाए गए । कथित तौर पर परिवार को धमकी भी दी गई कि अगर उन्होंने ग्रामीणों की मांगें मानने से इनकार कर दिया तो अनिश्चितकालीन बहिष्कार किया जाएगा ।
आयोग ने यह हस्तक्षेप 21 जून को मीडिया रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद किया है। आयोग ने पाया है कि यदि समाचार रिपोर्ट की विषय-वस्तु सही है, तो इससे पीड़ितों के मानवाधिकारों के उल्लंघन और गहरे भेदभाव का गंभीर मुद्दा उठता है तथा व्यक्तिगत अधिकारों और सम्मान की सुरक्षा के बारे में गंभीर चिंताएं उत्पन्न होती हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जातिगत भेदभाव के एक चौंकाने वाले मामले में, ओडिशा में एक परिवार के 40 सदस्यों को 'शुद्धिकरण' अनुष्ठान के तहत अपने सिर मुंडवाने के लिए मजबूर किया गया, क्योंकि परिवार की एक महिला ने दूसरी जाति के व्यक्ति से शादी कर ली थी। यह घटना रायगढ़ जिले के काशीपुर ब्लॉक में स्थित बैगनगुडा गांव में हुई। अनुसूचित जनजाति (एसटी) से ताल्लुक रखने वाली महिला ने हाल ही में गांव के बुजुर्गों की मर्जी के खिलाफ जाकर पास के गांव के अनुसूचित जाति (एससी) के व्यक्ति से शादी की थी। नतीजतन, उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया और समुदाय में वापस स्वीकार किए जाने के लिए उस पर यह अनुष्ठान करने का दबाव डाला गया।
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