कटक: ओडिशा उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें न्यायाधीशों की कमी को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की गई है। वर्तमान में, 33 न्यायाधीशों के स्वीकृत पदों के मुकाबले यहाँ केवल 15 न्यायाधीश काम कर रहे हैं, जबकि लगभग 1.7 लाख मामले लंबित हैं।

अधिवक्ता शिवशंकर मोहंती ने यह जनहित याचिका दायर की है। इसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की संस्थागत आवश्यकता पर विचार करे और रिक्त पदों को भरने की संवैधानिक प्रक्रिया में तेजी लाए। याचिका अभी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।

याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की उन सिफारिशों पर कानूनी रूप से और तेजी से कार्रवाई करने की मांग की है, जिन्हें 18 अगस्त, 2026 को मंजूरी दी गई थी। इन सिफारिशों में चार अधिवक्ताओं - सस्मिता त्रिपाठी, आदित्य नारायण दास, राजजीत रॉय और गौतम मिश्रा - को ओडिशा उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने का प्रस्ताव है।

अपनी याचिका के दायरे को स्पष्ट करते हुए, मोहंती ने कहा कि वह किसी विशेष अधिवक्ता की व्यक्तिगत उपयुक्तता या नियुक्ति के संबंध में कोई निर्देश नहीं मांग रहे हैं। इसके बजाय, याचिका में संविधान के अनुसार पर्याप्त संख्या में न्यायाधीशों की संस्थागत आवश्यकता पर विचार करने का आग्रह किया गया है।

जनहित याचिका में कहा गया है कि 18 न्यायाधीशों की कमी और बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण न्याय प्रशासन में गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं, विशेष रूप से मामलों को समय पर सूचीबद्ध करने और उनकी सुनवाई करने में। इसमें 17 अगस्त को ओडिशा उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन द्वारा जारी एक प्रेस नोट का भी जिक्र किया गया है, जिसमें न्यायाधीशों की भारी कमी और न्याय प्रणाली पर इसके प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी।

याचिका में कहा गया है, "ये परिस्थितियां दर्शाती हैं कि यह मुद्दा किसी व्यक्तिगत अधिवक्ता की नियुक्ति की संभावनाओं से जुड़ा नहीं है। यह एक संवैधानिक न्यायालय की संस्थागत क्षमता और वादियों के उस अधिकार से जुड़ा है, जिसके तहत उन्हें समय पर और प्रभावी ढंग से न्याय मिल सके। 

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