बारीपाड़ा: अपर्याप्त बुनियादी ढांचे और कर्मचारियों की कमी पिछले कई वर्षों से मयूरभंज जिले के आंगनवाड़ी केंद्रों में प्री-स्कूलिंग और बाल कल्याण सेवाओं को प्रभावित कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, जिले के 26 ब्लॉकों में कार्यरत 5,153 आंगनवाड़ी केंद्रों में से 1,182 में कोई स्थायी भवन नहीं है, 2,018 में बिजली की कमी है और 1,596 में सुरक्षित रसोई की सुविधा नहीं है।

बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को किराए के भवनों, स्कूल परिसरों, सामुदायिक संसाधन केंद्रों और कुछ मामलों में पेड़ों के नीचे भी काम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, लगभग 1.92 लाख लाभार्थी इन केंद्रों पर निर्भर हैं, जिनमें 18,374 गर्भवती महिलाएं, 11,428 स्तनपान कराने वाली माताएं, 0-6 महीने की उम्र के 11,666 शिशु, छह महीने से तीन साल की उम्र के 78,333 बच्चे और 3-6 साल की उम्र के 72,475 बच्चे शामिल हैं।

बिना स्वयं के भवन वाले 1,182 केंद्रों में से 313 किराए के परिसर में, 194 स्कूल परिसर में और 675 सामुदायिक संसाधन केंद्रों में संचालित होते हैं। इस बीच, 1,783 केंद्रों में कथित तौर पर स्वच्छता सुविधाओं की कमी है और 1,596 में पर्याप्त रसोई सुविधाएं नहीं हैं।

कई आंगनवाड़ी केंद्रों में पीने का पानी भी उपलब्ध नहीं है। हालाँकि आधिकारिक रिकॉर्ड कुछ और ही दावा करते हैं, लेकिन निवासियों का आरोप है कि कई केंद्र अभी भी पीने के पानी की कमी का सामना कर रहे हैं।

दूसरी ओर, कई आंगनवाड़ी केंद्रों में जनशक्ति की कमी के कारण सेवा वितरण में भी बाधा आ रही है। 192 पर्यवेक्षक पदों में से कम से कम 73 और 5,153 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पदों में से 98 वर्तमान में खाली हैं। आने वाले दिनों में लगभग 361 आंगनवाड़ी सहायक पद भी खाली होने वाले हैं।

 

Tags: