तेंटुलिखुंटी: नबरंगपुर जिले के तेंटुलिखुंटी ब्लॉक में स्थित हिरमिमुंडा मैदान में गुरुवार को एक बड़ी जनसभा आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध करना था। 'अनबाइका शक्ति प्रकल्प प्रतिरोध संग्राम समिति' द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य जोर जल, जमीन, जंगल, आजीविका और पर्यावरण की रक्षा करने पर था। इस सभा में कांग्रेस और बीजू जनता दल (बीजद) के नेताओं, पूर्व विधायकों, महिला समूहों, किसान संगठनों, युवा समूहों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी कंपनी NTPC, तेंटुलिखुंटी ब्लॉक की पुजारिगुडा पंचायत के अंतर्गत आने वाले हिरमिमुंडा में इस संयंत्र के लिए सर्वे कर रही है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों को उचित जानकारी दिए बिना ही, विभिन्न एजेंसियों के जरिए जमीन, भूजल स्तर और भौगोलिक स्थितियों की जांच की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि ग्राम सभाओं और पल्ली सभाओं में स्थानीय लोगों की राय लिए बिना ही इतनी बड़ी परियोजना की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। बीजद के आदिवासी सेल के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व सांसद प्रदीप माझी ने कहा कि नबरंगपुर जिले में प्रस्तावित संयंत्र के खिलाफ विरोध और तेज हो गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने प्रस्तावित परियोजना का विरोध करने के लिए कालाहांडी और नबरंगपुर जिलों के निवासियों की एक समिति बनाने का आह्वान किया। माझी ने कहा कि इस समिति की जिम्मेदारी समझदार और जिम्मेदार लोगों को सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने इस आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए वित्तीय, नैतिक और जन समर्थन जुटाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विपक्षी नेताओं और स्थानीय निवासियों ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर नबरंगपुर जिले में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजना को नहीं लगने देंगे और इसके खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया। डबुगांव के विधायक मनोहर रंधारी ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राज्य विधानसभा में उठाया जाएगा और राजनीतिक स्तर पर यह लड़ाई जारी रहेगी। रंधारी ने कहा कि यह संघर्ष केवल जिले या राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नई दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए वित्तीय सहायता, मजबूत संकल्प और जनता के समर्थन की आवश्यकता होगी। वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे स्वतंत्रता आंदोलन की तरह एकजुट हों और इस परियोजना का विरोध करने का सामूहिक संकल्प लें। लांजीगढ़ के विधायक प्रदीप दिशारी ने कहा कि अब एक संयुक्त समिति बनाना और भविष्य के विरोध-प्रदर्शनों के लिए रणनीति तैयार करना बहुत ज़रूरी हो गया है।
अन्य वक्ताओं में BJD की ज़िला अध्यक्ष मंजुला माझी, कांग्रेस की ज़िला अध्यक्ष लिपिका माझी, पूर्व विधायक सदाशिव प्रधान और भुजबल माझी, तथा वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुना त्रिपाठी शामिल थे। उन्होंने कहा कि नबरंगपुर जैसे पिछड़े ज़िले में, जहाँ लोग अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर शांति से रहते हैं, परमाणु ऊर्जा परियोजना को आसानी से स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के कारण ज़मीन का अधिग्रहण होगा, लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा, पर्यावरण प्रदूषित होगा और खेती को नुकसान पहुँचेगा, जो यहाँ के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। उन्होंने यह भी कहा कि इसका असर पड़ोसी ज़िलों - कालाहांडी, रायगडा और कोरापुट - तक भी पड़ेगा। राजेश जानी ने आरोप लगाया कि इससे 35 गाँव प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि 100 से ज़्यादा परिवारों के घर, खेत और पारंपरिक आजीविका छिन सकती है।
विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही 'संग्राम समिति' ने चेतावनी दी है कि अगर इस प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया, तो वे पूरे ज़िले में जन-आंदोलन को और तेज़ कर देंगे। इस सभा में प्रह्लाद हियाल, कांग्रेस नेता अखिल भतरा, पी. नागरात्नम और कई अन्य नेता, कार्यकर्ता तथा स्थानीय निवासी शामिल हुए।
Tags: