दक्षिणी ओडिशा में तीन दिन से भारी बारिश, भूस्खलन से सड़क-रेल यातायात प्रभावित
भुवनेश्वर। दक्षिणी ओडिशा के कई जिलों में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश ने जनजीवन बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई इलाकों में भूस्खलन, जलभराव, पेड़ गिरने और सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानें और मिट्टी सड़कों पर आने से वाहनों की आवाजाही बाधित हुई है, जबकि रायगड़ा जिले में रेलवे ट्रैक पर भूस्खलन के कारण ट्रेन सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
कंधमाल, गंजाम, गजपति, मलकानगिरी, रायगड़ा और कोरापुट समेत दक्षिणी ओडिशा के कई हिस्सों में बारिश का असर देखने को मिल रहा है। लगातार पानी गिरने के कारण पहाड़ी इलाकों की मिट्टी कमजोर हो गई है, जिससे जगह-जगह भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को घरों से बाहर निकलने और दैनिक जरूरतों के लिए आवागमन करने में परेशानी हो रही है।
कंधमाल जिले के कलिंगा घाट में बारिश के कारण बड़ा भूस्खलन हुआ है। यहां लगभग 200 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार बह जाने की सूचना है। पहाड़ी मार्ग पर सुरक्षा दीवार के क्षतिग्रस्त होने से सड़क की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। लगातार बारिश होने की स्थिति में आसपास की मिट्टी और चट्टानों के खिसकने का खतरा बना हुआ है।
कलिंगा घाट दक्षिणी ओडिशा के महत्वपूर्ण पहाड़ी मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से बड़ी संख्या में यात्री और मालवाहक वाहन गुजरते हैं। सुरक्षा दीवार के बहने के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग के लिए सड़क को सुरक्षित बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। प्रभावित हिस्से का निरीक्षण कर आगे की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी कदम उठाए जाने की जरूरत है।
गंजाम जिले के खल्लीकोट क्षेत्र में स्थित बड़ा घाटी में भी भूस्खलन का असर दिखाई दिया। राष्ट्रीय राजमार्ग-16 पर पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। सड़क पर चट्टानें आने के बाद यातायात को नियंत्रित करना पड़ा। मलबा हटाने के बाद ही वाहनों की सामान्य आवाजाही सुनिश्चित की जा सकती है।
NH-16 ओडिशा के प्रमुख राजमार्गों में से एक है। ऐसे में इस मार्ग पर यातायात बाधित होने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों और मालवाहक वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। बारिश जारी रहने के कारण पहाड़ी हिस्सों में वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
गजपति जिले के मोहना क्षेत्र में भी कई घाट सड़कों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर सड़क पर आने के कारण कुछ स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों के बाधित होने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
मलकानगिरी जिले के विभिन्न हिस्सों में भी लगातार बारिश का असर दिखाई दे रहा है। कई घाट क्षेत्रों में भूस्खलन के कारण सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। जिले में बड़ी संख्या में पहाड़ी और निचले इलाके मौजूद हैं, जहां तेज बारिश के दौरान सड़क संपर्क टूटने और जलभराव की स्थिति बनने का खतरा रहता है।
रायगड़ा जिले में बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिरने की घटनाएं हुई हैं। सड़कों पर पेड़ गिरने से वाहनों की आवाजाही बाधित हुई और स्थानीय प्रशासन को उन्हें हटाने के लिए टीमों को लगाना पड़ा। लगातार बारिश और तेज हवाओं की स्थिति में कमजोर पेड़ों के गिरने का खतरा और बढ़ सकता है।
रायगड़ा में रेल यातायात भी प्रभावित हुआ है। कोरापुट-रायगड़ा रेलवे लाइन पर सिकिरापई और केउटगुडा के बीच भूस्खलन के कारण रेलवे ट्रैक पर मिट्टी और चट्टानें आ गईं। सुरंग नंबर 29 के पास मलबा गिरने से रेल मार्ग अवरुद्ध हुआ और कुछ ट्रेनों को नजदीकी स्टेशनों पर रोकना पड़ा। रेलवे की इंजीनियरिंग और सुरक्षा टीमें ट्रैक से मलबा हटाने और रेल सेवा बहाल करने में जुटी हैं।
कोरापुट जिले में भी भारी बारिश से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर पेड़ सड़कों पर गिर गए हैं। पेड़ों को हटाने और यातायात सामान्य करने के लिए स्थानीय स्तर पर काम किया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण वाहन चालकों के लिए फिसलन और कम दृश्यता भी समस्या बन रही है।
चित्रकोंडा और आसपास के क्षेत्रों में भी सड़कों पर पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके कारण स्थानीय मार्गों पर आवाजाही बाधित हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने से लोगों को बाजार, अस्पताल और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
लगातार बारिश का सबसे अधिक असर कमजोर और कच्चे मकानों पर भी पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में मिट्टी से बने घरों को नुकसान पहुंचने की खबर है। लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने के कारण कच्ची दीवारों के कमजोर होने और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे घरों में रहने वाले लोगों के लिए बारिश का यह दौर चिंता का कारण बना हुआ है।
निचले इलाकों में जलभराव की समस्या भी गंभीर हो रही है। कई स्थानों पर बारिश का पानी घरों में घुस गया है। सड़कों और गलियों में पानी जमा होने से सामान्य आवागमन प्रभावित हुआ है। लगातार बारिश जारी रहने पर जलस्तर और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
दक्षिणी ओडिशा का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और वन क्षेत्रों से घिरा हुआ है। यहां भारी बारिश के दौरान भूस्खलन का खतरा सामान्य मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक रहता है। मिट्टी में लगातार नमी बढ़ने के बाद ढलानों पर मौजूद चट्टानें और मिट्टी नीचे खिसक सकती हैं। इसलिए घाट सड़कों पर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
प्रभावित जिलों में प्रशासन के सामने फिलहाल सड़क संपर्क बहाल करने, गिरे हुए पेड़ों और मलबे को हटाने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की चुनौती है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में नए भूस्खलन की आशंका को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर निगरानी जरूरी हो गई है।
बारिश के कारण बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर भी असर पड़ने की आशंका है। पेड़ गिरने से बिजली के तार या खंभे क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में संबंधित विभागों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रही हैं।
फिलहाल दक्षिणी ओडिशा के कई हिस्सों में मौसम की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। तीन दिनों की लगातार बारिश ने सड़क और रेल यातायात से लेकर घरों और बुनियादी ढांचे तक को प्रभावित किया है। कंधमाल के कलिंगा घाट से लेकर गंजाम के NH-16 और रायगड़ा-कोरापुट क्षेत्र तक भूस्खलन तथा पेड़ गिरने की घटनाओं के बीच प्रशासन की प्राथमिकता संपर्क मार्गों को सुरक्षित तरीके से बहाल करने और प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने की है।