पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ. केदारनाथ पाल को रिश्वत के मामले में कठोर कारावास की सज़ा सुनाई गई
भुवनेश्वर। ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच विजिलेंस विभाग को एक महत्वपूर्ण मामले में सफलता मिली है। नयागढ़ जिले के मध्यखंड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में पदस्थ रहे पूर्व मेडिकल ऑफिसर केदारनाथ पाल को रिश्वत लेने के मामले में अदालत ने दोषी करार दिया है। भुवनेश्वर की अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश विजिलेंस अदालत ने सेवानिवृत्त मेडिकल ऑफिसर को तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
ओडिशा विजिलेंस के मुताबिक केदारनाथ पाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उन्हें दोषी पाया।
PHC कर्मचारी से रिश्वत लेने का था आरोप
मामला नयागढ़ जिले के मध्यखंड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़ा हुआ है। विजिलेंस के अनुसार केदारनाथ पाल पर PHC के ही एक कर्मचारी से रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का आरोप था। यह रकम कर्मचारी के HUDCO लोन के भुगतान यानी डिस्बर्समेंट से संबंधित काम के बदले मांगी गई थी।
आरोप था कि मेडिकल ऑफिसर ने कर्मचारी का काम आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग की। शिकायत सामने आने के बाद ओडिशा विजिलेंस ने मामले में कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की थी। इसके बाद पर्याप्त सामग्री मिलने पर केदारनाथ पाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की संबंधित धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की गई।
विजिलेंस कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सजा
मामले की सुनवाई भुवनेश्वर स्थित अतिरिक्त विशेष न्यायाधीश विजिलेंस की अदालत में हुई। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद पूर्व मेडिकल ऑफिसर केदारनाथ पाल को दोषी ठहराया।
अदालत ने पाल को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केदारनाथ पाल अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उनके खिलाफ यह मामला उनकी सेवा अवधि के दौरान रिश्वत मांगने और लेने के आरोप से संबंधित था।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई
ओडिशा विजिलेंस ने केदारनाथ पाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(d) और धारा 7 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था। ये प्रावधान लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग कर अनुचित लाभ प्राप्त करने और रिश्वत से संबंधित मामलों में लागू किए जाते रहे हैं।
विजिलेंस की जांच और अदालत में चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब मामले में दोषसिद्धि हुई है। विभाग की ओर से कहा गया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लगातार जारी है।
अब पेंशन रोकने की तैयारी
अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद केदारनाथ पाल की मुश्किलें यहीं समाप्त नहीं होंगी। ओडिशा विजिलेंस ने बताया है कि अब पूर्व मेडिकल ऑफिसर की पेंशन रोकने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कार्रवाई शुरू की जाएगी।
विजिलेंस विभाग संबंधित प्राधिकारी से उनकी दोषसिद्धि के आधार पर पेंशन रोकने का अनुरोध करेगा। हालांकि पेंशन को लेकर अंतिम निर्णय नियमानुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपी अधिकारी अब सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके बावजूद सेवा अवधि के दौरान भ्रष्टाचार के मामले में दोषसिद्धि होने के बाद विभाग उनके खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने जा रहा है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की कार्रवाई
ओडिशा विजिलेंस सरकारी विभागों में रिश्वत और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है। रिश्वत मांगने और लेने के मामलों में शिकायत मिलने के बाद जांच, ट्रैप कार्रवाई और फिर अदालत में अभियोजन की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
मध्यखंड PHC से जुड़े इस मामले में भी लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद पूर्व मेडिकल ऑफिसर को सजा सुनाई गई है। अदालत के फैसले के बाद विजिलेंस अब प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
पूर्व मेडिकल ऑफिसर को तीन साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा के साथ ही अब उनकी पेंशन पर भी फैसला होना बाकी है। विजिलेंस द्वारा सक्षम प्राधिकारी के पास प्रस्ताव भेजे जाने के बाद इस संबंध में आगे की कार्रवाई की जाएगी।