नुआपाड़ा। सरकारी नौकरी दिलाने का वादा कर एक व्यक्ति से कथित रूप से दो लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में पुलिस ने अपने ही विभाग के एक कॉन्स्टेबल को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान 39 वर्षीय जोगेंद्र बाग के रूप में हुई है। वह लखना पुलिस स्टेशन में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रुपये लेने के बावजूद बाग ने न तो उसे नौकरी दिलाई और न ही बार-बार मांगने पर उसकी रकम वापस की।
पुलिस के अनुसार, सिनापाली पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले डांगरगांव के एक निवासी ने 11 सितंबर को मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी मुलाकात जोगेंद्र बाग से हुई थी। आरोप है कि कॉन्स्टेबल ने अपने संपर्कों और प्रभाव का भरोसा दिलाते हुए उसे सरकारी विभाग में नौकरी दिलाने का वादा किया। इसके बदले आरोपी ने उससे दो लाख रुपये की मांग की।
शिकायतकर्ता ने कथित रूप से नौकरी मिलने की उम्मीद में कॉन्स्टेबल पर विश्वास कर लिया। उसने मांगी गई रकम आरोपी के बैंक खाते में जमा कर दी। पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि 21 जनवरी 2026 को दो लाख रुपये की रकम जोगेंद्र बाग के भारतीय स्टेट बैंक खाते में जमा हुई थी। इस बैंक लेनदेन को शिकायत से जुड़ा महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
शिकायत में कहा गया है कि रकम मिलने के बाद बाग ने नौकरी दिलाने के लिए समय मांगा। कुछ समय तक वह अलग-अलग कारण बताकर शिकायतकर्ता को भरोसा देता रहा। निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी जब नौकरी से संबंधित कोई दस्तावेज या नियुक्ति की जानकारी नहीं मिली तो पीड़ित को संदेह होने लगा। उसने आरोपी से संपर्क कर नौकरी के संबंध में स्पष्ट जवाब मांगा।
आरोप है कि कॉन्स्टेबल ने पहले शिकायतकर्ता को इंतजार करने के लिए कहा। लंबे समय तक कोई परिणाम नहीं मिलने पर शिकायतकर्ता ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की। उसने कई बार जोगेंद्र बाग से संपर्क किया, लेकिन उसे पैसे नहीं लौटाए गए। नौकरी न मिलने और रकम वापस न होने से परेशान होकर उसने पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया।
शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने आरोपों का सत्यापन शुरू किया। शिकायतकर्ता से पैसे दिए जाने की तारीख, बैंक खाते और आरोपी के साथ हुई बातचीत से संबंधित जानकारी मांगी गई। बैंक रिकॉर्ड देखने पर दो लाख रुपये आरोपी कॉन्स्टेबल के खाते में जमा होने की पुष्टि होने का दावा किया गया। इसके बाद मामले में जोगेंद्र बाग की कथित भूमिका की पड़ताल आगे बढ़ाई गई।
प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी कॉन्स्टेबल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद उसे धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। एक पुलिसकर्मी पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये लेने का आरोप सामने आने के कारण मामला गंभीर माना जा रहा है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को किस पद या विभाग में नौकरी दिलाने का वादा किया था।
अधिकारियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती भी है कि कथित सौदा केवल दो लाख रुपये तक सीमित था या आरोपी ने किसी अन्य व्यक्ति से भी इसी तरह रकम ली है। आरोपी के बैंक खाते में हुए अन्य संदिग्ध लेनदेन और उसके संपर्कों की पड़ताल से मामले के दूसरे पहलू सामने आ सकते हैं। हालांकि किसी अन्य पीड़ित या अतिरिक्त रकम के बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को नियुक्ति का झांसा देकर ठगी करने के मामले अक्सर सामने आते हैं। आरोपी बेरोजगार लोगों की मजबूरी और जल्द नौकरी पाने की इच्छा का फायदा उठाते हैं। वे सरकारी अधिकारियों से संपर्क होने, भर्ती प्रक्रिया में प्रभाव रखने या पैसे देकर चयन कराने का दावा करते हैं। इस तरह के दावों पर भरोसा कर लोग अपनी बचत या उधार ली गई रकम तक सौंप देते हैं।
इस मामले में आरोपी स्वयं पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल के पद पर तैनात था। वर्दी और सरकारी पद के कारण शिकायतकर्ता का विश्वास मजबूत हुआ होगा, लेकिन पुलिस ने इस संबंध में कोई निश्चित टिप्पणी नहीं की है। यदि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने पद या पहचान का इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ लिया जाता है तो यह न केवल आपराधिक मामला है, बल्कि विभागीय अनुशासन का भी गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि उसके निलंबन या विभागीय जांच के संबंध में अभी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। संबंधित विभाग मामले में एकत्र किए गए साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे का फैसला कर सकता है। आरोप सिद्ध होने या अदालत के निर्णय से पहले आरोपी को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार रहेगा।
पुलिस बैंक खाते में जमा हुई रकम का स्रोत और उसके बाद उस राशि के इस्तेमाल की जानकारी जुटा सकती है। शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच फोन कॉल, संदेश या अन्य बातचीत उपलब्ध होने की स्थिति में उसका भी सत्यापन किया जा सकता है। इन तथ्यों से यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि पैसे किस उद्देश्य से दिए गए और आरोपी ने नौकरी दिलाने के संबंध में क्या आश्वासन दिया था।
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि उसने पैसे लौटाने के लिए कई बार आग्रह किया, लेकिन आरोपी ने कोई कदम नहीं उठाया। यदि रकम समय पर वापस कर दी जाती या नौकरी के संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर दी जाती तो शायद मामला शिकायत तक नहीं पहुंचता। लगातार टालमटोल के बाद पीड़ित ने 11 सितंबर को सिनापाली पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
यह घटना सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोगों में जागरूकता की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। किसी भी सरकारी नौकरी के लिए चयन निर्धारित परीक्षा, योग्यता और आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से होता है। कोई कर्मचारी या बिचौलिया पैसे लेकर नौकरी दिलाने का दावा करता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दी जानी चाहिए।
नौकरी के इच्छुक लोगों को भर्ती से जुड़ी जानकारी केवल आधिकारिक वेबसाइटों और सरकारी सूचनाओं से प्राप्त करनी चाहिए। किसी व्यक्ति के निजी बैंक खाते में रकम जमा करने से पहले उसके दावे की पुष्टि करना जरूरी है। नौकरी दिलाने के नाम पर नकद या ऑनलाइन भुगतान मांगना संभावित धोखाधड़ी का संकेत हो सकता है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपी कॉन्स्टेबल जोगेंद्र बाग को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक खाते में जमा दो लाख रुपये और शिकायतकर्ता के बयान के आधार पर मामले की आगे की पड़ताल की जा रही है। आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।