Odisha ओडिशा: सरकार ने स्कूली शिक्षा और छात्र कल्याण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने बुधवार को मुख्यमंत्री पोषण योजना (एमएमपीवाई) के दायरे का विस्तार करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत अब सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों को भी मुफ्त मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस योजना के विस्तार से किशोर छात्रों में कुपोषण की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही स्कूलों में उपस्थिति दर बढ़ने और छात्रों के ड्रॉपआउट रेट में कमी आने की उम्मीद है। यह निर्णय शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री पोषण योजना (एमएमपीवाई) को 1 अप्रैल 2025 से शुरू किया था। अब इस योजना के विस्तार के साथ माध्यमिक स्तर के छात्रों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है। पहले यह सुविधा सीमित कक्षाओं तक ही उपलब्ध थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर कक्षा 9 और 10 तक कर दिया गया है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को स्कूल में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है, ताकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर हो सके। सरकार का मानना है कि अच्छा पोषण मिलने से छात्र पढ़ाई में अधिक ध्यान दे पाएंगे और उनका शैक्षणिक प्रदर्शन भी सुधरेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरावस्था में पोषण की कमी का सीधा असर छात्रों के स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता पर पड़ता है। ऐसे में यह योजना न केवल शिक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि स्वास्थ्य सुधार में भी अहम भूमिका निभाएगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस विस्तार से राज्य के लाखों छात्रों को लाभ मिलेगा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में यह योजना विशेष रूप से प्रभावी साबित हो सकती है, जहां कई बार छात्र आर्थिक कारणों से नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते।
मंत्रिमंडल के इस निर्णय को सामाजिक और शैक्षिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे स्कूलों में बच्चों की भागीदारी बढ़ने और शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
शिक्षा विभाग के अनुसार, योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्कूल स्तर पर निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि सभी छात्रों को समय पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जा सके।
कुल मिलाकर, ओडिशा सरकार का यह फैसला छात्रों के समग्र विकास और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे राज्य में शिक्षा के स्तर में सुधार की उम्मीद की जा रही है।